मौलाना मदनी ने की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग, कहा- मुसलमानों को कोई आपत्ति नहीं, हिंदू इसे मां मानते हैं, फिर सरकार क्यों बच रही

By Ashish Meena
मई 21, 2026

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए। अगर सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देती है तो मुसलमानों को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी। बल्कि उन्हें खुशी होगी। क्योंकि गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और हिंसा की घटनाएं रुक जाएंगी।

बुधवार को पत्र जारी कर मदनी ने कहा कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा देती है तो फिर सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से क्यों बच रही है? उसकी ऐसी क्या राजनीतिक मजबूरी है?

साधुओं की मांग को सरकार क्यों नहीं मान रही

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग केवल हम नहीं कर रहे हैं। साधु-संत भी कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार इस विषय को गंभीरता से नहीं ले रही है। इसका क्या अर्थ निकाला जाए?

गाय के मुद्दे को एक राजनीतिक और भावनात्मक विषय बना दिया गया है। कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से गोकशी की अफवाह फैलाकर या पशु तस्करी के नाम पर निर्दोष लोगों को हिंसा का शिकार बना देते हैं। लगातार झूठ और अफवाहों के जरिए पूरे देश में मुसलमानों की छवि खराब कर दिया गया है।

इस कारण से समाज का एक बड़ा वर्ग मुसलमानों को गाय का विरोधी समझने लगा है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। पहले बड़ी संख्या में मुसलमान गाय पालते थे। उससे दूध का व्यवसाय करते थे। लेकिन साल 2014 के बाद से माहौल बदला, इस कारण से मुसलमानों ने एहतियात बरतनी शुरू कर दी। अब लोग गाय की जगह भैंस पालना अधिक सुरक्षित समझते हैं।

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद मुसलमानों को यह सलाह देती रही है कि ऐसा कोई काम न किया जाए। जिससे दूसरे धर्मों के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों। इस्लाम इसकी अनुमति नहीं देता है।

मौलाना ने कहा कि राजनीति के लिए गाय में भी भेदभाव पैदा कर दिया

देश में पशु वध से संबंधित कानून सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं हैं। कई राज्यों में खुलेआम गोमांस खाया जाता है। एक केंद्रीय मंत्री भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे बीफ खाते हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने यह बयान दिया था कि उन राज्यों में गाय नहीं, बल्कि मिथुन का मांस खाया जाता है। जिसे आम बोलचाल में जर्सी गाय कहा जाता है। राजनीति के लिए गाय में भी भेदभाव पैदा कर दिया गया।

इन लोगों को गाय से श्रद्धा नहीं है। राजनीति से प्रेम है। हमें इससे कोई मतलब नहीं कि कौन-सी गाय पवित्र मानी जाती है और कौन-सी नहीं। हम चाहते हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करके इस विवाद को खत्म कर दिया जाए। इसके लिए जो भी कानून बनाया जाए, उसे देश के सभी राज्यों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू किया जाए।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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