MP: केन-बेतवा प्रभावितों का चिता आंदोलन फिर शुरू हुआ, न्याय दो या मार दो के नारे लगाए, आदिवासी महिलाएं कर रहीं नेतृत्व

By Ashish Meena
जुलाई 4, 2026

मालवा जंक्शन, छतरपुर।

छतरपुर और पन्ना जिलों में चल रही विभिन्न परियोजनाओं, जिनमें केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय माध्यम, रूंझ, नैगुवा सिंचाई और एनटीपीसी शामिल हैं, में कथित अन्याय और झूठे आश्वासनों के खिलाफ स्थगित ‘चिता आंदोलन’ फिर से शुरू हो गया है।

यह आंदोलन ‘न्याय दो या मार दो’ के नारे के साथ शुक्रवार से केन-बेतवा प्रभावित कुपी ग्राम के पास केन नदी की सहायक बराना नदी पर चल रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्व आदिवासी महिलाएं कर रही हैं।

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प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए

सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलन के नेता अमित भटनागर ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अमित ने आरोप लगाया कि प्रशासन के भ्रष्ट और तानाशाही रवैये के कारण लगभग 50 हजार लोग बेघर हो गए हैं। इन लोगों को उनके जल, जंगल, जमीन, आजीविका और संस्कृति से उजाड़ दिया गया है।

अमित भटनागर ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण 46 लाख पेड़ों, पन्ना टाइगर रिजर्व और केन नदी के विनाश को पर्यावरण के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की।

आरोप- एक भी वादे का पालन नहीं हुआ

आंदोलन के नेताओं दिव्य अहिरवार, चिता और लक्ष्मी आदिवासी ने कहा कि अप्रैल में चले उनके ‘चिता आंदोलन’ के बाद प्रशासन ने उनकी मांगें पूरी करने के जितने भी वादे किए थे, उनमें से एक का भी पालन नहीं किया गया। इसके विपरीत, लोगों में भय का माहौल पैदा करने के लिए उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए, अवैध बेदखली की गई, बिजली काटी गई और स्कूल तोड़े गए।

आदिवासी महिलाओं, जिनमें बड़ी बहू आदिवासी भी शामिल हैं, का कहना है कि इस बार वे सरकार के झूठे आश्वासनों में नहीं आएंगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उन्हें न्याय नहीं दे सकती, तो उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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