PM मोदी ने की सोना न खरीदने की अपील, क्या ये 1980 जैसे महा-क्रैश की चेतावनी तो नहीं? जब गोल्ड में आई थी 50 फीसदी गिरावट

By Ashish Meena
मई 11, 2026

पिछले एक-डेढ़ साल में सोने की बढ़ती कीमतों ने हर किसी को हैरान कर दिया है. अभी भारत में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1,53,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है. बाजार में छाई इस तेजी ने निवेशकों को खुश तो किया है, लेकिन साथ ही एक पुराना डर भी पैदा कर दिया है. 1980 के दशक वाला डर.

सोने की चाल को करीब से फॉलो करने वाले जानते होंगे कि 1980 में क्या हुआ था. उनके सामने सवाल ये है कि क्या सोने में निवेश जारी रखा जाए या फिर 1980 जैसे क्रैश का इंतजार किया जाए. जी हां, 1980 में एक बहुत तगड़ा क्रैश हुआ था, जिसके चलते सोने की कीमतों में 50 फीसदी की गिरावट आ गई थी.

अब चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है, तो ऐसे में कुछ लोग 1980 के दशक वाले क्रैश के बारे में भी बात कर रहे हैं. उस दौर में भी सोने का रेट उसी तरह आसमान में उड़ रहा था, जैसे आज उड़ रहा है. फिर अचानक से सब कुछ बदल गया था. देखते ही देखते सोना धरातल पर आ गया. तब क्या हुआ था? कैसे हालात थे? और आज के हालात क्या उस समय से मिलते-जुलते हैं? क्या वैसा ही क्रैश हमें फिर से देखने को मिलेगा? चलिए समझते हैं.

किन कारणों से हुआ था 1980 वाला क्रैश?

1980 के उस दौर को समझने के लिए उससे भी थोड़ा पीछे जाना होगा. 1970 के दशक में दुनियाभर में महंगाई बहुत ज्यादा थी. ईरान की क्रांति से लेकर सोवियत संघ के अफगानिस्तान पर हमले जैसी घटनाओं ने डर का माहौल बना दिया था. जब भी दुनिया में तनाव बढ़ता है, लोग सोने को सबसे सुरक्षित निवेश या सेफ हेवन (Safe Haven) मानते हैं. इसी वजह से 21 जनवरी 1980 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 850 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. 1979 के आखिर तक जो सोना करीब 500 डॉलर का था, वह कुछ ही हफ्तों में बहुत महंगा हो गया. लेकिन यह तेजी ज्यादा दिन नहीं टिकी.

सोने की कीमतों में भारी उछाल के बाद एक बड़ा क्रैश आया. अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के उस समय के चेयरमैन पॉल वोल्कर (Paul Volcker) ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ब्याज दरों को 13 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 20 प्रतिशत तक पहुंचा दिया. ब्याज दरें इतनी ज्यादा होने की वजह से डॉलर बहुत मजबूत हो गया और निवेशकों ने सोने से पैसा निकालकर बैंकों में जमा करना शुरू कर दिया.

इसके अलावा हंट ब्रदर्स (Hunt Brothers) द्वारा चांदी के बाजार में की गई गड़बड़ी पकड़े जाने से भी कीमती धातुओं के दाम गिर गए. नतीजा यह हुआ कि 1980 के अंत तक सोना 600 डॉलर पर आ गया और अगले 2 सालों में यह 300 से 400 डॉलर की रेंज में जा गिरा. कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बड़ी गिरावट आई और फिर अगले 20 साल तक सोने में काफी सुस्ती देखने को मिली.

आज के हालात और 1980 में क्या अंतर है?

आज मई 2026 में हालात 1980 जैसे तो लग रहे हैं, लेकिन कुछ बड़े बदलाव भी हैं. इस समय भी मिडिल ईस्ट में तनाव और रूस-यूक्रेन जैसे युद्धों की वजह से सोने के दाम बढ़े हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,700 डॉलर के करीब है और कुछ समय पहले इसने 5,000 डॉलर का स्तर भी पार किया था.

1980 की तरह ही आज भी महंगाई और युद्ध का डर लोगों को सोना खरीदने के लिए उकसा रहा है. लेकिन आज एक सबसे बड़ा सहारा यह है कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (Central Bank), खासकर भारत और चीन के बैंक, लगातार बहुत सारा सोना खरीद रहे हैं. यह खरीदारी कीमतों को अचानक गिरने से बचाने का काम कर रही है.

जानकारों का मानना है कि इस बार 1980 जैसा 50 प्रतिशत का महा-क्रैश होना थोड़ा मुश्किल है. इसका कारण यह है कि आजकल डिजिटल गोल्ड और ईटीएफ (ETF) जैसे निवेश के कई नए रास्ते खुल गए हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि गिरावट नहीं आएगी. अगर मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अचानक कम हो जाता है या अमेरिका का फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत की कमी देखी जा सकती है.

कितनी गिरावट आ सकती है?

अगर हम आने वाले समय की बात करें तो सोने में कुछ करेक्शन (Correction) होने की पूरी गुंजाइश है. अगर बाजार में थोड़ा बहुत करेक्शन होता है तो 10 ग्राम सोने की कीमत 1,30,000 से 1,38,000 रुपये तक आ सकती है. लेकिन अगर तनाव काफी कम हो गया और डॉलर बहुत ज्यादा मजबूत हुआ, तो यह भाव गिरकर 1,15,000 से 1,25,000 रुपये के स्तर तक भी जा सकता है. बहुत ही खराब स्थिति में, जिसे हम 1980 जैसा सिनेरियो कह सकते हैं, सोना 1 लाख रुपये के स्तर तक भी फिसल सकता है, हालांकि इसकी उम्मीद फिलहाल बहुत कम नजर आती है.

निवेशकों के लिए क्या सलाह?

निवेशकों को किसी भी तरह के निवेश से पहले किसी सेबी रजिस्टर्ड एडवाइज से सलाह लेनी चाहिए. फिर भी अभी का सीन देखते हुए उपयुक्त फैसला ये हो सकता है कि ज्यादा जोश में आकर एक साथ सारा पैसा सोने में न लगाएं. बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं, इसलिए थोड़ा-थोड़ा निवेश करना या सिप (SIP) का रास्ता अपनाना ज्यादा बेहतर है.

अलग-अलग एक्सपर्ट लंबे समय के लिए सोने को अब भी एक अच्छा निवेश मान रहे हैं, क्योंकि दुनिया में अस्थिरता खत्म नहीं हुई है. कई बड़े जानकारों को तो अभी भी लगता है कि 2027 तक सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छू सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. एक अहम बात ये कि यदि सोने में निवेश करना ही है तो ईटीएफ या ईजीआर का तरीका अपनाएं.

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।