Ladli Behna Yojana: लाडली बहना योजना के नए फॉर्म कब से भरेंगे? विधानसभा में सरकार ने किया साफ!

By Ashish Meena
फ़रवरी 24, 2026

Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की लाखों महिलाओं के मन में पिछले कई महीनों से एक ही सवाल घूम रहा है, लाडली बहना योजना के नए फॉर्म आखिर कब भरेंगे? गांव-गांव में, शहरों की कॉलोनियों में, आंगनवाड़ी केंद्रों के बाहर और जनसेवा केंद्रों पर यही चर्चा सुनाई देती है। जिन महिलाओं की उम्र हाल ही में 18 साल पूरी हुई है या जो पहले किसी कारण से आवेदन नहीं कर पाईं, वे लगातार नई तारीख का इंतजार कर रही हैं।

इसी सवाल की गूंज अब मध्य प्रदेश विधानसभा तक पहुंच गई। विपक्ष ने सदन में सरकार से सीधे पूछा कि मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन कब शुरू होंगे। लेकिन सरकार के जवाब ने साफ कर दिया कि फिलहाल नए फॉर्म शुरू करने की कोई योजना नहीं है। इस बयान के बाद महिलाओं में एक बार फिर निराशा का माहौल बन गया है।

लाडली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन पर सरकार का स्पष्ट जवाब

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सरकार से पूछा कि लाडली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन लंबे समय से बंद क्यों हैं और इन्हें कब दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं सिर्फ इसलिए योजना से वंचित हैं क्योंकि आवेदन की प्रक्रिया बंद पड़ी है।

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महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने सदन में जवाब देते हुए बताया कि योजना की शुरुआत से अब तक कुल 1,31,06,525 महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से वर्तमान में 1,25,29,051 महिलाएं नियमित रूप से लाभ ले रही हैं। उन्होंने कहा कि हर आवेदन की जांच की जाती है और पात्रता के आधार पर ही लाभ दिया जाता है। फिलहाल लाडली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन शुरू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।

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18 साल पूरी करने वाली महिलाओं का क्या होगा?

विपक्ष ने यह मुद्दा भी उठाया कि जो लड़कियां अब 18 साल की हो चुकी हैं, वे योजना का लाभ नहीं ले पा रहीं। लाडली बहना योजना की पात्रता के अनुसार 18 से 60 वर्ष तक की विवाहित महिलाएं इस योजना में आवेदन कर सकती थीं। लेकिन जब रजिस्ट्रेशन ही बंद हैं, तो नई पात्र महिलाएं आवेदन कैसे करें?

यह सवाल सिर्फ राजनीतिक नहीं है, बल्कि सामाजिक भी है। गांवों में कई परिवार ऐसे हैं जहां 1250 या 1500 रुपये की मासिक राशि घर के खर्च में बड़ी मदद करती है। रसोई गैस, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और छोटे-मोटे घरेलू खर्च में यह रकम सहारा बनती है। ऐसे में नई महिलाओं का बाहर रह जाना उनके लिए आर्थिक नुकसान जैसा है। लाडली बहना योजना के नए फॉर्म कब भरेंगे, यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि हर महीने हजारों लड़कियां 18 साल की उम्र पूरी करती हैं और वे भी इस योजना से जुड़ना चाहती हैं।

60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं पर सरकार का पक्ष

सदन में यह मुद्दा भी उठा कि 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को योजना से बाहर किया जा रहा है। इस पर मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि 60 साल से ऊपर की महिलाओं को अन्य पेंशन योजनाओं के तहत लाभ दिया जा रहा है। यानी सरकार का तर्क है कि उन्हें अलग से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल किया गया है।

हालांकि विपक्ष का कहना है कि कई महिलाओं को न तो समय पर पेंशन मिल रही है और न ही वे लाडली बहना योजना में रह पा रही हैं। इस कारण उन्हें दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है। विपक्ष ने सरकार से साफ तारीख बताने की मांग की, लेकिन कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई।

1000 से 1500 रुपये तक का सफर और 3000 रुपये का वादा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन में बताया कि योजना की शुरुआत में महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह दिए जाते थे। बाद में इसे दो चरणों में 250-250 रुपये बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2028 तक इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।

यह बयान महिलाओं के लिए उम्मीद भरा जरूर है, लेकिन जब तक लाडली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं होते, तब तक नई पात्र महिलाएं इस बढ़ी हुई राशि का लाभ भी नहीं ले पाएंगी। यही वजह है कि विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई और आखिर में विपक्ष ने वॉकआउट भी किया।

राजनीतिक बहस और महिलाओं की उम्मीदें

जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दोबारा पूछा कि आखिर नई तारीख क्या है, तो सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया। यह मुद्दा अब सिर्फ योजना का नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन चुका है।

लेकिन राजनीति से अलग हटकर अगर देखा जाए तो असली चिंता उन महिलाओं की है जो हर महीने मिलने वाली राशि का इंतजार कर रही हैं। कई परिवारों में यह पैसा सीधे महिला के खाते में जाता है, जिससे उसे आर्थिक आत्मनिर्भरता का अहसास होता है। यही कारण है कि लाडली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन का सवाल इतना बड़ा बन गया है।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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