MP सरकार ने किया बड़ा ऐलान, सोयाबीन के बाद अब इस फसल पर भी मिलेगा भावांतर योजना का लाभ, जाने किसानों को कैसे मिलेगा फायदा
By Ashish Meena
फ़रवरी 24, 2026
मध्यप्रदेश के किसानों के लिए सरकार की ओर से एक अहम घोषणा की गई है। अब सरसों की फसल बेचने वाले किसानों को भी सोयाबीन की तरह भावांतर योजना का लाभ मिलेगा। यानी अगर मंडी में दाम समर्थन मूल्य से कम मिलते हैं, तो सरकार कीमत का अंतर सीधे किसानों के खाते में डालेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसके साथ ही उड़द पर प्रति क्विंटल 600 रुपये का बोनस देने और चना, मसूर व तुअर को प्राइस सपोर्ट स्कीम में शामिल करने का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा गया है।
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किसानों को कैसे मिलेगा फायदा
MP में अभी सरसों का मंडी भाव 5,500 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है, जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,200 रुपये है। ऐसे में किसानों को अपनी फसल का पूरा दाम नहीं मिल पा रहा था।
अब सरसों पर भावांतर योजना लागू होने से यदि बाजार भाव समर्थन मूल्य से कम रहेगा, तो सरकार अंतर की राशि किसानों को देगी। इस फैसले से हजारों सरसों उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार पहले सोयाबीन पर भावांतर योजना लागू कर चुकी है। 6.86 लाख किसानों को 1,492 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इस मॉडल को सफल मानते हुए अब सरसों में भी इसे लागू करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरसों के क्षेत्र में इस बार 28 प्रतिशत वृद्धि हुई है और उत्पादन 15.71 लाख टन होने का अनुमान है। ऐसे में किसानों को उचित मूल्य दिलाना जरूरी है।

उड़द पर 600 रुपये बोनस और दलहन को बढ़ावा
सरकार ने दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए हैं। ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर उड़द को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति क्विंटल 600 रुपये का बोनस दिया जाएगा।
इससे किसान अधिक से अधिक उड़द की खेती करने के लिए प्रेरित होंगे। प्रदेश में बिजली और पानी की उपलब्धता को देखते हुए दलहन उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
इसके साथ ही चना, मसूर और तुअर को प्राइस सपोर्ट स्कीम में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। प्रस्ताव में 6.45 लाख टन चना और एक लाख टन मसूर के उपार्जन की बात कही गई है। तुअर की खरीद भी इसी योजना के तहत करने की तैयारी है।
कृषक कल्याण वर्ष 2026: सरकार का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि किसान को केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता और उद्यमी के रूप में विकसित किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश को खाद्यान्न उत्पादों का बड़ा केंद्र बनाया जाए। किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए नई योजनाएं लाई जा रही हैं। सरसों पर भावांतर योजना और उड़द पर बोनस इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विपक्ष ने उठाए बिजली और गेहूं पंजीयन के मुद्दे
विधानसभा में इस घोषणा के दौरान विपक्ष ने भी कई मुद्दे उठाए। प्रतिपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि किसानों को कम से कम 12 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मक्का खरीदने का प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा गया है। गेहूं पंजीयन में भी किसानों को दिक्कत आ रही है और सर्वर डाउन की शिकायतें मिल रही हैं। इन मुद्दों पर सरकार ने कहा कि व्यवस्थाओं को सुधारने के प्रयास जारी हैं और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
ओलावृष्टि से नुकसान पर सर्वे और मुआवजे का आश्वासन
प्रश्नकाल के दौरान ओलावृष्टि से गेहूं, धनिया और अफीम की फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठा। नीमच, रतलाम और मंदसौर में अफीम की फसल को भारी नुकसान हुआ है। गुना में धनिया की फसल बर्बाद हो गई और कई जगह गेहूं की फसल खेत में लेट गई है।
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। कहीं 10 प्रतिशत तो कहीं 15 प्रतिशत तक नुकसान की जानकारी मिली है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद मापदंड के अनुसार राहत राशि दी जाएगी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि फसल बीमा और राहत वितरण में पारदर्शिता रखी जाएगी।
