उज्जैन के बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में 1.31 करोड़ के नोटों से श्रृंगार, महाशिवरात्रि मेले में उमड़ा सैलाब
By Ashish Meena
फ़रवरी 25, 2026
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन हमेशा से आस्था का बड़ा केंद्र रही है। लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ महाशिवरात्रि की नहीं, बल्कि एक ऐसी अनोखी सजावट की है जिसे देखकर हर कोई हैरान है। उज्जैन के पास बड़नगर में स्थित बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार 1.31 करोड़ रुपए के असली नोटों से किया गया है।
मंदिर में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है जैसे धन ने भक्ति का रूप ले लिया हो। मुकुट से लेकर हार, दीवारों की सजावट से लेकर दरबार तक हर जगह करेंसी नोटों की चमक दिखाई देती है। महाशिवरात्रि मेले के बीच यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बन गया है।
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1.31 करोड़ के नोटों से सजा बुद्धेश्वर महादेव मंदिर
इस साल बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में 1 करोड़ 31 लाख रुपए के असली नोटों से श्रृंगार किया गया। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह परंपरा पिछले पांच वर्षों से चली आ रही है, लेकिन इस बार राशि अब तक की सबसे बड़ी है।
करीब सात कुशल कलाकारों की टीम ने 48 घंटे लगातार मेहनत कर यह सजावट तैयार की। तीन दिन तक नोटों को गिनकर, सुरक्षित तरीके से डिजाइन में लगाया गया। नोटों से मुकुट बनाया गया, लंबी मालाएं तैयार की गईं और दीवारों पर सुंदर डिजाइन बनाई गई। यह सजावट अस्थायी है और 26 फरवरी तक दर्शन के लिए खुली रहेगी। इसके बाद पूरी राशि को सुरक्षित रूप से वापस रखा जाएगा।
महाशिवरात्रि मेले में उमड़ी भारी भीड़
महाशिवरात्रि के बाद यहां हर साल भव्य मेला लगता है। इस बार मेला 14 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी तक चलेगा। 1.31 करोड़ के नोटों से सजे भोलेनाथ की झांकी देखने के लिए आसपास के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बड़नगर पहुंच रहे हैं।
मंदिर परिसर में सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। कई लोग मोबाइल से तस्वीरें ले रहे हैं, तो कई श्रद्धालु शांति से दर्शन कर मनोकामना मांग रहे हैं। बच्चों और युवाओं के लिए यह नजारा किसी बड़े आयोजन से कम नहीं है।
स्थानीय दुकानदारों के लिए भी यह मेला खुशियों का समय है। प्रसाद, मिठाई, खिलौने और पूजा सामग्री की दुकानों पर अच्छी बिक्री हो रही है। होटल और ढाबों में भीड़ बढ़ गई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो रहा है।
आस्था या आकर्षण? क्या कहता है मंदिर प्रबंधन
कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि 1.31 करोड़ के नोटों से सजावट क्या सिर्फ दिखावा है या आस्था का प्रतीक? मंदिर समिति का कहना है कि यह परंपरा श्रद्धालुओं के सहयोग से निभाई जाती है।मंदिर प्रबंधन के अनुसार, सभी नोट असली हैं और उनकी पूरी गिनती और रिकॉर्ड रखा गया है। आयोजन के बाद रकम को सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा। यह सजावट श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है, न कि प्रदर्शन का साधन। पिछले पांच वर्षों में हर साल राशि बढ़ी है। इस बार 1.31 करोड़ रुपए की सजावट ने इसे पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इतनी बड़ी रकम को खुले तौर पर सजाना आसान काम नहीं है। इसलिए मंदिर परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, अतिरिक्त गार्ड तैनात हैं और स्थानीय पुलिस की निगरानी भी लगातार जारी है।
सजावट के दौरान हर नोट को गिनकर दर्ज किया गया। कलाकारों ने इस बात का ध्यान रखा कि नोट सुरक्षित रहें और डिजाइन भी सुंदर दिखे। आयोजन समाप्त होने के बाद पूरी राशि को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा।
उज्जैन की धार्मिक पहचान और नई परंपरा
महाकालेश्वर मंदिर के कारण उज्जैन पहले से ही धार्मिक मानचित्र पर खास स्थान रखता है। अब बड़नगर का बुद्धेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी अनोखी करेंसी सजावट के कारण अलग पहचान बना रहा है। धार्मिक आयोजनों में भव्यता नई बात नहीं है, लेकिन 1.31 करोड़ के नोटों से श्रृंगार जैसी परंपरा कम ही देखने को मिलती है। सोशल मीडिया पर भी इस आयोजन की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।
श्रद्धालुओं के लिए क्या मायने रखता है यह आयोजन
1.31 करोड़ के नोटों से सजे भोलेनाथ की झांकी श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि गहरी आस्था का प्रतीक है। कई भक्त इसे सुख-समृद्धि और शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं। मंदिर में आने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी ऐसी सजावट नहीं देखी। परिवारों के लिए यह यादगार अनुभव बन गया है। यह आयोजन बताता है कि समय के साथ परंपराएं नए रूप ले सकती हैं, लेकिन उनकी जड़ें आस्था में ही होती हैं।
