इंदौर-राजगढ़ मार्ग पर नियमों की उड़ी धज्जियां, मौत को दावत दे रही सुभाष ट्रेवल्स की बसें, बस के ऊपर बैठे 10-15 लोग, जिम्मेदार मौन

By Ashish Meena
मार्च 1, 2026

मध्य प्रदेश के इंदौर में यात्री बसों के संचालन में लापरवाही और दबंगई का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सुभाष ट्रेवल्स (Subhash Travels) की बस का है, जहाँ यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर उन्हें ‘भेड़-बकरियों’ की तरह बस के अंदर ही नहीं, बल्कि बस की छत पर भी बिठाया जा रहा है।

प्रशासन के दावों की खुली पोल!

राष्ट्रीय एकता के पास मौजूद वीडियो प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है, जिसमें यात्री मौत का सफर करने को मजबूर हैं।

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छत पर बैठे दिखे 10-15 यात्री

रविवार को इंदौर से राजगढ़ की ओर जा रही सुभाष ट्रेवल्स की बस (नंबर MP13ZM6216) का एक हैरान करने वाला वीडियो राष्ट्रीय एकता (Rashtiyaekta.com) के पास आया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बस के अंदर पैर रखने की जगह नहीं है और बस की छत पर कम से कम 10-15 लोग अपनी जान जोखिम में डालकर बैठे हुए हैं। बस की रफ़्तार तकरीबन 90 से ऊपर है। तेज रफ्तार में चलती बस के ऊपर बैठे ये यात्री किसी भी बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं।

जिम्मेदारों की नाक के नीचे ‘ओवरलोडिंग’ का खेल

प्राइवेट बस संचालकों द्वारा अधिक मुनाफे के चक्कर में नियमों को ताक पर रखना आम बात हो गई है। सुभाष ट्रेवल्स जैसी बसें खुलेआम आरटीओ नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, लेकिन प्रशासन की ‘खामोशी’ कई सवाल खड़े करती है।

क्या कहता है कानून?

यात्री बसों को परमिट एक निश्चित मानक और बैठने की क्षमता (Sitting Capacity) के आधार पर दिया जाता है। परमिट से अधिक सवारी बिठाना कानूनन अपराध है। बस की छत पर यात्रियों को बिठाना पूरी तरह प्रतिबंधित और आपराधिक श्रेणी में आता है। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 (MV Act 1988) के सेक्शन 192 के तहत ओवरलोडिंग पर भारी आर्थिक जुर्माना और बस का परमिट रद्द करने का प्रावधान है।

खतरे में यात्रियों की जान

जानकारों का मानना है कि बस की छत पर यात्री बैठने से बस का सेंटर ऑफ ग्रेविटी (Center of Gravity) बिगड़ जाता है, जिससे मोड़ पर या तेज रफ्तार में बस के पलटने का खतरा 80% तक बढ़ जाता है। अगर कोई अनहोनी होती है, तो जान-माल का बड़ा नुकसान तय है।

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? सुभाष ट्रेवल्स की इस मनमानी और यात्रियों की जान से खिलवाड़ पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। इंदौर परिवहन विभाग को चाहिए कि वे ऐसे बस संचालकों के परमिट तुरंत प्रभाव से निरस्त करें।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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