रसोई गैस को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब इन लोगों को नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर, आदेश तुरंत प्रभाव से लागू

By Ashish Meena
मई 26, 2026

भारत में रसोई गैस को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को अब एलपीजी सिलेंडर खरीदने से रोक दिया है। सरकार का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना बताया जा रहा है, जिससे भारत की गैस सप्लाई पर गंभीर असर पड़ा है।

दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यही रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस सप्लाई के लिए सबसे अहम माना जाता है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है और इसमें से करीब 90% सप्लाई मिडिल ईस्ट देशों से आती है। ऐसे में अगर सप्लाई चेन बाधित होती है तो भारत में गैस की कमी और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

सरकार ने इसी संकट को देखते हुए अब उन लोगों पर फोकस करना शुरू किया है, जिनके घरों में पहले से पाइप्ड गैस कनेक्शन मौजूद है, यानी अगर किसी घर में PNG कनेक्शन है, तो वह अब घरेलू एलपीजी सिलेंडर नहीं खरीद सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे एलपीजी की बचत होगी और जरूरतमंद लोगों तक सप्लाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

जानकारों के मुताबिक भारत में साल 2025 के दौरान करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की खपत हुई थी। इसका बड़ा हिस्सा घरेलू रसोई गैस के रूप में इस्तेमाल होता है। लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पहले ही कुछ उद्योगों के लिए एलपीजी सप्लाई में कटौती की जा चुकी है और अब घरेलू स्तर पर भी सख्ती शुरू हो गई है।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला सिर्फ गैस बचाने के लिए नहीं बल्कि देश की विदेशी मुद्रा और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी उठाया गया कदम है। सरकार लंबे समय से PNG नेटवर्क को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, क्योंकि पाइप्ड गैस को एलपीजी की तुलना में ज्यादा स्थिर और सुविधाजनक माना जाता है। बड़े शहरों में तेजी से PNG कनेक्शन बढ़ाए जा रहे हैं, ताकि लोगों की निर्भरता सिलेंडर पर कम हो सके।

कई उपभोक्ताओं को परेशानी

हालांकि, इस फैसले से कई उपभोक्ताओं को परेशानी भी हो सकती है। कुछ लोग बैकअप के तौर पर एलपीजी सिलेंडर रखते थे, ताकि पाइप्ड गैस सप्लाई में दिक्कत आने पर काम चल सके। अब ऐसे लोगों को सिर्फ PNG पर ही निर्भर रहना होगा। इसके अलावा जिन इलाकों में पाइप्ड गैस सप्लाई नियमित नहीं रहती, वहां यह फैसला लोगों की चिंता बढ़ा सकता है।

दूसरी तरफ सरकार के लिए यह एक बड़ा संतुलन बनाने वाली स्थिति है। एक ओर उसे आम जनता को गैस उपलब्ध करानी है, तो दूसरी ओर बढ़ती वैश्विक कीमतों और सप्लाई संकट से भी निपटना है। आने वाले महीनों में अगर मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं हुआ, तो भारत में एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल सरकार का साफ संदेश है कि जिन घरों तक पाइप्ड गैस पहुंच चुकी है, उन्हें अब सिलेंडर छोड़कर PNG को पूरी तरह अपनाना होगा। यही कदम आने वाले समय में भारत की ऊर्जा नीति का बड़ा हिस्सा बन सकता है

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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