मध्यप्रदेश के आधे हिस्से में आज आंधी-बारिश का अलर्ट, इन 25 जिलों में बारिश की संभावना

By Ashish Meena
अक्टूबर 20, 2026

दशहरा पर आज मध्यप्रदेश के आधे हिस्से में आंधी-बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग के 25 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। बारिश के अलर्ट को देखते हुए भोपाल में कलाकारों ने रावण के पुतलों को बरसाती से ढक दिया है। साल 2022 में बारिश के कारण पुतले नहीं जल पाए थे और उन्हें जलाने के लिए केरोसिन-पेट्रोल डालना पड़ा था।

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटे में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, रायसेन, सागर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश होने का अनुमान है।

साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) और ट्रफ की वजह से ऐसा हो सकता है। अगले 4 दिन यानी, 23 अक्टूबर तक बारिश का दौर रहेगा। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा या इससे अधिक रफ्तार से आंधी भी चल सकती है। दूसरी ओर, पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में धूप निकलने के आसार है।

रात में 20 डिग्री से नीचे पारा

इधर, न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से नीचे चल रहा है। बीती रात छिंदवाड़ा में 17.4 डिग्री, कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री, आलीराजपुर व गुना में 18 डिग्री, अमरकंटक में 18.4 डिग्री और नीमच के मरुखेड़ा में 18.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। खंडवा, उज्जैन, खरगोन, रतलाम, राजगढ़ और रायसेन में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से ज्यादा है।

गुना में साढ़े 4 इंच… इंदौर समेत कई जिलों में पानी गिरा

प्रदेश में पिछले 4 दिन से आंधी-बारिश हो रही है। गुना में एक ही दिन में साढ़े 4 इंच पानी गिर गया। इंदौर, शाजापुर, सीहोर, मंदसौर, उज्जैन, आगर-मालवा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल और छिंदवाड़ा में भी बारिश रिकॉर्ड की गई। इंदौर में सोमवार को दिन में रुक-रुककर बारिश हुई। ऐसा ही मौसम अन्य जिलों में भी बना रहा।

2022 में भी तेज बारिश हुई थी

इससे पहले साल 2022 में भी दशहरा के दिन तेज बारिश हुई थी। भोपाल में बारिश में भींगने की वजह से रावण का पुतला नहीं जला तो उस पर केरोसिन और पेट्रोल डाला गया था। प्रदेश के अन्य जिलों में भी बारिश की वजह से रावण दहन प्रभावित हुआ था।

3 अक्टूबर को ही लौट चुका मानसून

प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही मानसून लौट चुका है। एक ही दिन में पूरे प्रदेश से विदाई हुई, लेकिन सिस्टम एक्टिव होने से बारिश का दौर अभी भी चल रहा है। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी और पश्चिमी हिस्से के जिलों में आंधी-बारिश का असर देखा गया। पिछले 4 दिन से कई जिलों में तेज बारिश भी हुई। मंगलवार को भी बारिश का अलर्ट है।

विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है। वहीं, कई जिलों में बारिश भी हो रही है। इस बार प्रदेश में 100 दिन तक दक्षिण-पश्चिम मानसून एक्टिव रहा है।

इस साल सामान्य से कम हुई बारिश

दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।

प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।

इन 25 जिलों में बारिश का कोटा फुल

भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

वहीं 30 जिलों में कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

इस बार जून सूखा रहा, इस वजह से आंकड़ा कम

मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जुलाई, अगस्त और सितंबर का कोटा तो फुल रहा, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि इस साल प्रदेश में 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है।

आगे ये भी पढ़ें :
Ashish Meena

Ashish Meena

ashish-meena

आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

»