₹9 लाख बकाया के चक्कर में बंद की पूरे गाँव की बिजली, बिल भरने वाले 5 घर भी अंधेरे में पिसने को मजबूर

By Ashish Meena
सितम्बर 28, 2026

विशेष संवाददाता | छैगांवमाखन (खंडवा)

खंडवा जिले के छैगांवमाखन जनपद अंतर्गत आने वाले ग्राम खजूरी से बिजली कंपनी की तुगलकी कार्यप्रणाली का एक अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पिछले तीन महीने से पूरा गाँव ‘ब्लैकआउट’ की मार झेल रहा है। ₹9 लाख की बकाया राशि वसूलने के चक्कर में बिजली कंपनी ने पूरे गाँव की बिजली आपूर्ति ही ठप कर दी है। इस सामूहिक सजा का खामियाजा उन ईमानदार ग्रामीणों को भी भुगतना पड़ रहा है, जो हर महीने अपना बिजली बिल नियमित रूप से जमा करते हैं।

ट्रांसफॉर्मर खराब हुआ तो थमा दिया फरमान

ग्रामीणों के अनुसार, करीब तीन महीने पहले गाँव का ट्रांसफॉर्मर जल गया था। नियमानुसार कंपनी को इसे बदलकर नई सप्लाई शुरू करनी चाहिए थी, लेकिन सुधरवाने की जगह बिजली विभाग ने ग्रामीणों पर बकाया बिल जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब बकाया राशि जमा नहीं हुई, तो बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई।

नियम ताक पर: ईमानदार उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा

गाँव की इस व्यवस्था पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीण विनोद चौहान का कहना है, “बिजली कंपनी का नियम है कि जो उपभोक्ता बिल नहीं भरता, केवल उसका कनेक्शन काटा जाए। पूरे गाँव की बिजली काट देना कहाँ का न्याय है? जो लोग समय पर बिल भर रहे हैं, उन्हें किस बात की सजा दी जा रही है?”

70 में से 65 उपभोक्ता डिफॉल्टर, ₹9 लाख बकाया

मामले में बिजली वितरण कंपनी के लाइनमैन शिवनारायण कुशवाह का कहना है कि गाँव में कुल 70 कनेक्शनधारी हैं। इनमें से केवल 5 परिवार ही नियमित बिल भरते हैं, जबकि 65 उपभोक्ताओं पर लगभग ₹9 लाख रुपये का बिल बकाया है।

गाँव में करीब 40 से 50 परिवार आदिवासी वर्ग के हैं। कई उपभोक्ताओं ने कनेक्शन लेने के बाद से आज तक एक बार भी बिल जमा नहीं किया है, जिससे कई घरों पर ₹40-40 हजार तक का बकाया चढ़ चुका है। कंपनी का कहना है कि जब तक बकाया राशि का बड़ा हिस्सा जमा नहीं होता, तब तक सेवा बहाल करना मुश्किल है।

समाधान की दरकार

एक तरफ जहाँ बकाया वसूली के लिए बिजली विभाग अड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ 5 बेकसूर परिवारों के साथ-साथ पूरा गाँव मूलभूत सुविधा से वंचित है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में बीच का रास्ता निकालकर कब तक गाँव को अंधेरे से मुक्ति दिलाता है।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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