खातेगांव तहसील के किसानों की चिंता बढ़ी! सोयाबीन की फसल पर मंडराया पीला मोजेक का खतरा, कृषि विशेषज्ञों ने बचाव के उपाय बताए

By Ashish Meena
सितम्बर 9, 2026

मालवा जंक्शन, खातेगांव।
देवास जिले के खातेगांव तहसील अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल पर ‘पीला मोजेक’ रोग का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। फसल में इस खतरनाक बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र की संयुक्त विशेषज्ञ टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए प्रभावित गांवों का दौरा किया और खेतों का प्रत्यक्ष जायजा लिया।

विशेषज्ञों की टीम ने किया खेतों का दौरा

सोयाबीन की फसल में रोग फैलने की सूचना मिलते ही कृषि विज्ञान केंद्र देवास और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों व वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम ने खातेगांव क्षेत्र के ग्राम सुकरास, ओलम्बा, भवरास, सुकेड़ी, मनोरा, आमला और विक्रमपुर के खेतों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ किसानों के खेतों में सोयाबीन की पत्तियों पर पीले धब्बे और मोजेक रोग के शुरुआती व स्पष्ट लक्षण मौजूद हैं, जिससे फसल के विकास पर असर पड़ रहा है।

रोग का मुख्य कारण और सफेद मक्खी का प्रकोप

उप संचालक कृषि ज्ञानसिंह मोहनिया ने किसानों को जागरूक करते हुए बताया कि सोयाबीन में लगने वाला पीला मोजेक रोग मुख्य रूप से ‘सफेद मक्खी’ के कारण फैलता है। यह कीट वायरस का वाहक होता है, जो स्वस्थ पौधों को भी संक्रमित कर देता है। इसलिए इस रोग से फसल को बचाने के लिए सबसे पहले सफेद मक्खी के नियंत्रण पर विशेष जोर देना बेहद आवश्यक है।

वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए बचाव के उपाय

फसल को बचाने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ महत्वपूर्ण और तकनीकी उपाय अपनाने की सलाह दी है। किसान भाई रोजाना अपने खेतों में जाकर सोयाबीन की फसल की सेहत की निगरानी करें। सफेद मक्खी को नियंत्रित करने के लिए थायोमेथाक्जाम 25% WG की 125 ग्राम मात्रा अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL की 125 मिली मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में मिलाकर सही तरीके से छिड़काव करें। यदि खेत में बीमारी के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत अपने नजदीकी कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों से संपर्क करें।

निरीक्षण के दौरान प्रमुख अधिकारी रहे मौजूद

इस विशेष निरीक्षण अभियान के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र देवास के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र सिंह और डॉ. अरविंदर कौर ने खेतों में जाकर फसलों की स्थिति का बारीक अध्ययन किया। उनके साथ सहायक संचालक कृषि लोकेश गंगराडे, एन.एस. गुर्जर, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी दिलीप मीणा, दिनेश पंवार समेत विभाग के कई अन्य कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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