मध्यप्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई, सरकारी अस्पतालों में OPD सेवाएं ठप, भोपाल में 3 दिन से सड़क पर डॉक्टर्स

By Ashish Meena
सितम्बर 9, 2026

मालवा जंक्शन, भोपाल।
मध्य प्रदेश में डॉक्टर्स के आंदोलन के बाद चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. एमबीबीएस इंटर्न्स पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न्स ने काम बंद कर दिया है. राज्य की राजधानी भोपाल के कमला पार्क में भी इंटर्न्स का धरना पिछले 3 दिनों से जारी है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बेनतीजा रहने के बाद आज भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर सहित प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं. साथ ही प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज में काली पट्टी बांधकर चिकित्सा शिक्षक और अन्य स्टाफ काम करेंगे.

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में ओपीडी बंद कर दी गई है और बाकी सेवाएं चालू हैं. भोपाल में मंगलवार को भी सरकारी अस्पतालों के जूनियर डॉक्टर्स ने धरना-प्रदर्शन किया था.

JUDA ने सरकार को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार को 24 घंटे का समय दिया है. संगठन का कहना है कि यदि इस अवधि में कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर भी ओपीडी और वैकल्पिक ओटी सेवाएं बंद कर देंगे. इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर और बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.

क्या है मांग?

एमबीबीएस इंटर्न्स की मांग है कि उनका स्टाइपेंड बढ़ाया जाए. फिलहाल उन्हें हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड के रूप में मिलते हैं, जो उनके कार्यभार और जरूरतों की तुलना में काफी कम है, जिसे बढ़ाने की वह मांग कर रहे हैं. मेडिकल स्टूडेंट्स का कहना है कि एमपी में अन्य राज्यों की तुलना में कम स्टाइपेंड मिलता है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है.

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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