हरदा में 19 वर्षीय महिला ने खुद डिलीवरी की कोशिश की, नवजात का सिर-धड़ अलग हुआ, परिजन पॉलीथिन में बॉडी लेकर अस्पताल पहुंचे

By Ashish Meena
मई 3, 2026

Harda News : हरदा में लेबर पेन होने पर महिला ने खुद डिलीवरी की कोशिश की। इसमें नवजात का धड़ बाहर आ गया, जबकि सिर पेट में फंसा रहा। हालत देखकर परिजन घबरा गए। बच्चे का धड़ पॉलीथिन में रखकर महिला को जिला अस्पताल ले गए।

यहां डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव कराकर सिर बाहर निकाला। महिला की हालत स्थिर है। मामला मांगरूल गांव में शुक्रवार का है। पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई है।

खेत में काम करते वक्त उठा दर्द

मैदा गांव की 19 वर्षीय अंजू पति जितेंद्र बछान्या के साथ मजदूरी करने मांगरूल आई थी। विष्णु के खेत में काम करते शुक्रवार शाम करीब 5 बजे उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। अस्पताल जाने के बजाय उसने खेत में खुद डिलीवरी की कोशिश की। इसमें नवजात का धड़ सिर से अलग हो गया।

चीख सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे। उसे गाड़ी में लिटाया। बच्चे का धड़ पॉलीथिन की थैली में रखा। देर शाम हरदा जिला अस्पताल पहुंचे। यहां महिला डॉक्टरों ने अंजू के पेट में फंसा सिर बाहर निकाल लिया।

पहले हो चुकी प्री-मैच्योर डिलीवरी

जितेंद्र बछान्या ने कहा- हमारी शादी तीन साल पहले हुई थी। जुलाई 2025 में अंजू सात महीने की गर्भवती थी। दर्द उठने पर उसे हंडिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां उसने बेटी को जन्म दिया।

समय से पहले डिलीवरी के कारण बच्ची करीब डेढ़ महीने तक जिला अस्पताल के एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में भर्ती रही। संभलने पर घर लाए, जहां कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई।

42 हफ्ते का था बच्चा, पैरों का हिस्सा बाहर आया

डॉ. गंभीर पटेल ने बताया कि नवजात करीब 24 हफ्ते का था। अंजू की हालत खतरे से बाहर है। परिजन ने कहा कि उसे पहले सात महीने की बच्ची हुई थी, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। यह दूसरी बार है, जब प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन चौधरी ने कहा- अंजू ने बताया कि बच्चे के पैरों का हिस्सा बाहर आ गया था। उसने उसे निकालने की कोशिश की। जोर लगाने पर सिर और धड़ अलग हो गया।

डॉक्टर बोले- अस्पताल में चेकअप जरूरी था

डॉ. चौधरी ने कहा- पहली प्री-मैच्योर डिलीवरी के बाद दंपती को सावधानी बरतनी थी। समय-समय पर अस्पताल में चेकअप कराना जरूरी था।

इस जांच में मरीज की सरवाइकल लेंथ यानी बच्चेदानी का मुंह चेक किया जाता है। लेंथ छोटी होने पर कट लगाया जाता है। लेबर पेन बढ़े या वाटर बैग फूटे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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