गेहूं की पराली जलाने में मध्यप्रदेश देश में नंबर वन, शिवराज सिंह चौहान का विदिशा और उज्जैन सबसे आगे

By Ashish Meena
अप्रैल 24, 2026

मध्यप्रदेश में गेहूं की पराली जलाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) और ICAR के डेटा के मुताबिक, देश में पराली जलाने के मामलों में एमपी पहले स्थान पर पहुंच गया है।

5 राज्यों के 29,167 मामलों में से करीब 69% हिस्सेदारी एमपी से ही है। यहां 1-21 अप्रैल के बीच राज्य में 20,164 घटनाएं दर्ज की गईं, जो देश में सबसे अधिक हैं।

जिला स्तर पर देखें तो केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र विदिशा और उज्जैन गेहूं की पराली जलाने के सबसे आगे है। हालांकि, अभी यह आंकड़ा पिछले साल से थोड़ा कम है। 2025 में कुल 20,422 मामले सामने आए थे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल फसल अवशेष जलाने के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री का शहर पराली जलाने में टॉप पर

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र विदिशा पराली जलाने में सबसे आगे है। यहां 1–21 अप्रैल तक 2086 घटनाएं सामने आईं। इसके बाद उज्जैन में जहां 2053 और रायसेन में 1982 मामले दर्ज किए गए। वहीं होशंगाबाद में 1705 और सिवनी में 1369 घटनाएं मामले आए।

एमपी के बाद यूपी और हरियाणा में सबसे ज्यादा केस

एमपी के बाद पराली जलाने के मामलों में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जहां 1–21 अप्रैल 2026 के बीच 8,889 घटनाएं दर्ज की गईं, हालांकि यह आंकड़ा मध्यप्रदेश से काफी कम है। इसके बाद हरियाणा का स्थान आता है, जहां इस अवधि में 65 मामले सामने आए। वहीं पंजाब में सबसे कम 44 घटनाएं दर्ज की गईं।

अब जानिए किसान ऐसा कर क्यों रहे….

एमपी में पराली जलाने के बढ़ते मामलों पर गंजबासौदा स्थित कृषि महाविद्यालय के प्रोफेसर आशीष श्रीवास्तव कहते हैं कि किसान गेहूं की कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई करते हैं। उनके पास समय बहुत कम होता है, इसलिए किसान पराली जलाने जैसे आसान तरीके अपनाते हैं।

किसानों के पास और क्या विकल्प

किसान पराली जलाने के बजाय सुपरसीडर, रोटावेटर, सुपर स्ट्रॉ, मल्चर और रीपर जैसे कृषि यंत्रों का इस्तेमाल कर सकते हैं। गेहूं के भूसे का इस्तेमाल पशु चारे के रूप में भी कर सकते हैं। किसान पूसा डीकंपोजर के घोल का छिड़काव कर सकते हैं, जिससे पराली प्राकृतिक खाद में बदल जाती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।

पराली जलाना प्रतिबंधित

केवल एमपी नहीं पूरे देश में पराली (फसल अवशेष) जलाना प्रतिबंधित है। ऐसा करते पाए जाने पर स्थानीय प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। पराली जलाने वाले किसानों पर ₹2,500 से ₹15,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि सजा का प्रावधान भी है।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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