देवास शराब कांड में बड़ा खुलासा: AI से सीखा नकली शराब बनाने का तरीका, इंदौर से मंगवाया केमिकल, लाइसेंसी ठेकों से बेची, 13 मौतों के बाद हुआ पर्दाफाश
By Ashish Meena
अक्टूबर 28, 2026
मध्य प्रदेश के देवास जिले के चंदाना और आसपास के गांवों में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी अजय राठौर ने कथित तौर पर अपने घर में नकली शराब तैयार की और उसे लाइसेंसी दुकानों से मिलने वाली शराब की पेटियों में मिलाकर सप्लाई किया। पुलिस अब केमिकल की खरीद से लेकर नकली शराब बनाने और गांवों तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
AI की मदद से शराब बनाने का तरीका खोजने का आरोप
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अजय राठौर ने 27-28 सितंबर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नकली शराब बनाने का तरीका तलाशना शुरू किया था। इसके बाद इंदौर के दवा बाजार से केमिकल मंगवाया गया, जो कथित तौर पर 1 और 2 अक्टूबर के आसपास उसके पुआड़ा दाई स्थित घर पहुंचा।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कबाड़ियों से मिली पुरानी शराब की बोतलों में केमिकल और पानी मिलाकर नकली शराब तैयार की थी। इसके लिए बोतलों के ढक्कन भी मंगवाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, 2 से 6-7 अक्टूबर के बीच घर में नकली शराब बनाने का काम किया गया। इस मामले में लोहार पिपलिया के गोविंद और गधेशिया पिपलिया के रामेश्वर की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
लाइसेंसी शराब की पेटियों में मिलाकर की सप्लाई
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, 7 से 12 अक्टूबर के बीच नकली शराब बेची गई। आरोप है कि नकली शराब की बोतलों को लाइसेंसी शराब की पेटियों में मिलाकर गांवों और मोहल्लों तक पहुंचाया जाता था। इसी नेटवर्क के जरिए शराब चंदाना निवासी विनोद जायसवाल तक पहुंची, जहां से इसे आगे बेचे जाने की बात सामने आई है।
पूछताछ में जितेंद्र मालवीय और राहुल गिरी गोस्वामी के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस जांच कर रही है कि लाइसेंसी दुकानों से शराब की आपूर्ति किस तरह होती थी और इस पूरे मामले में संबंधित लोगों की क्या भूमिका रही। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
इंदौर में केमिकल सप्लाई करने वाला गोदाम सील
पुलिस के मुताबिक, जिस गोदाम से मुख्य आरोपी के लिए केमिकल भेजा गया था, उसे सील कर दिया गया है। जांच एजेंसियां केमिकल की खरीद, उसकी आपूर्ति और इस्तेमाल से जुड़े साक्ष्य जुटा रही हैं। अजय राठौर के घर और गोविंद के ठिकाने से भी सबूत एकत्र किए जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश के लिए टीमें भेजी गई हैं। केमिकल और बोतलों के ढक्कन की आपूर्ति करने वालों की भूमिका भी जांची जा रही है।
27 सितंबर से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला
ग्रामीणों के अनुसार, इस मामले में मौतों का सिलसिला 27 सितंबर को किशोर परमार की मौत से शुरू हुआ। इसके बाद अक्टूबर में कई अन्य लोगों की मौत की जानकारी सामने आई। बताया गया कि शराब पीने के बाद कुछ लोगों को पेट दर्द, चक्कर, घबराहट और उल्टी जैसी समस्याएं हुईं तथा उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई।
कुछ लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, मौतों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का नकली शराब से सीधा संबंध स्थापित करने के लिए जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
विसरा और शराब की बोतलें FSL भेजीं
पुलिस के मुताबिक, सिविल लाइन थाने में मामले से संबंधित दो प्रकरण दर्ज किए गए हैं। मृतकों के विसरा, घरों से मिली शराब की खाली बोतलों और अन्य संदिग्ध सामग्री को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों की वास्तविक वजह और शराब में मौजूद पदार्थों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
पुलिस ने अवैध शराब रखने, बेचने और परिवहन करने से संबंधित कार्रवाई के साथ आबकारी अधिनियम की धारा 49-ए भी जोड़ी है। मौतों के मामले में हत्या या अन्य धाराएं लागू होंगी या नहीं, इस पर जांच पूरी होने और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद निर्णय लिया जाएगा।
संभागीय जांच समिति ने दर्ज किए बयान
चंदाना और बिंजाना गांवों में हुई मौतों के मामले में उज्जैन संभागायुक्त की ओर से गठित जांच समिति ने भी पड़ताल शुरू कर दी है। समिति ने गांव पहुंचकर मृतकों के परिजनों से बातचीत की और यह जानने की कोशिश की कि संबंधित लोगों ने शराब कहां से खरीदी, उसे पीने के बाद तबीयत कब बिगड़ी और इलाज के लिए किन अस्पतालों में ले जाया गया।
करीब दो घंटे तक चली जांच के दौरान उन लोगों से भी जानकारी ली गई, जिनकी शराब पीने के बाद आंखों की रोशनी प्रभावित होने की शिकायत सामने आई थी। जांच के समय पुलिस, आबकारी और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
संभागायुक्त की ओर से गठित समिति को 15 दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। समिति को मौतों के कारणों, घटना से जुड़े हालात और प्रशासनिक स्तर पर किसी संभावित लापरवाही की जांच करनी है। टीम ने पहले चंदाना और फिर बिंजाना गांव पहुंचकर जानकारी जुटाई।
पूरे नेटवर्क की जांच जारी
फिलहाल पुलिस का फोकस केमिकल की खरीद से लेकर कथित तौर पर नकली शराब तैयार करने, उसे लाइसेंसी शराब की पेटियों में मिलाने और गांवों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और जांच समिति की रिपोर्ट से मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
