मध्यप्रदेश के 12 जिलों में सूखे जैसे हालात, विशेष सहायता देने की तैयारी, किसानों और पेयजल पर रहेगा फोकस
By Ashish Meena
अक्टूबर 28, 2026
मध्य प्रदेश में कम बारिश से प्रभावित जिलों को राहत देने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। 27 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश के 12 जिलों में बारिश की कमी को देखते हुए किसानों की जरूरतों, सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को लागू करने और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया है।
अलीराजपुर में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, अलीराजपुर में सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार, शाजापुर, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा में भी बारिश की कमी सामने आई है। इन जिलों में खेती और जल उपलब्धता की स्थिति को देखते हुए विशेष निगरानी की जरूरत है।
किसानों और पेयजल व्यवस्था पर रहेगा फोकस
कम बारिश का असर आगामी रबी सीजन की खेती पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार ने प्रभावित जिलों में किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करने और जल संसाधनों का सोच-समझकर इस्तेमाल करने पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले भी कम बारिश वाले जिलों में गेहूं की बुआई को लेकर सावधानी बरतने तथा कम पानी की जरूरत वाली फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए थे। साथ ही, बांधों और जलाशयों में उपलब्ध पानी की समीक्षा करने और पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया था।
जल संरक्षण के लिए भी कदम
प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देने की तैयारी है। इसके तहत जलस्रोतों की स्थिति की समीक्षा, पानी के बेहतर प्रबंधन और जलगंगा अभियान के अंतर्गत गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य उपलब्ध पानी का उपयोग जरूरत के अनुसार करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना भी है।
क्या 12 जिले सूखाग्रस्त घोषित होंगे?
कम बारिश के बीच इन जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, बारिश की कमी और आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किए जाने में अंतर है। अंतिम निर्णय के लिए फसल की स्थिति, मिट्टी में नमी, जलस्रोतों की उपलब्धता और अन्य निर्धारित मानकों का आकलन जरूरी होता है।
प्रभावित किसानों को किस प्रकार की आर्थिक सहायता मिलेगी, राहत की राशि कितनी होगी और सहायता वितरण की प्रक्रिया क्या रहेगी, इस संबंध में विस्तृत प्रावधानों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
