नई तकनीक फेल या भ्रष्टाचार का खेल? इंदौर में बने PM आवास ढाई साल में जर्जर, लाइट हाउस प्रोजेक्ट के फ्लैट में टपक रही छत, PMO तक पहुंची शिकायत फिर भी समस्या बरकरार
By Ashish Meena
मई 12, 2026
इंदौर के कनाड़िया रोड स्थित गुलमर्ग परिसर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने ‘लाइट हाउस प्रोजेक्ट’ अब विवादों के घेरे में आ गए है। करीब ढाई साल पहले यहां बने 1024 फ्लैट अब रहने लायक नहीं बचे हैं। फ्लैट में दीवारों में दरारें आ गई हैं, तो हर घर में सीपेज, लीकेज और स्ट्रक्चर में लगी जंग से रहवासी परेशान हैं।
पिछले एक साल में रहवासी निगम से लेकर केंद्र सरकार, पीएमओ तक कई बार शिकायतें भेज चुकी हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब परेशान होकर रहवासियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। रहवासियों का आरोप है कि फ्लैट में शुरू से ही निर्माण संबंधी खामियां सामने आने लगी थीं।
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बाथरूम और छतों से पानी टपकना, लीकेज के कारण करंट फैलने जैसी समस्याओं की शिकायतें लगातार की गईं। इसके बावजूद जिम्मेदार एजेंसियों की ओर से केवल अस्थायी मरम्मत की गई। समस्याओं से परेशान होकर लाइट हाउस प्रोजेक्ट के रहवासियों ने याचिकाकर्ता नरेंद्र गोस्वामी के जरिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार और निर्माण कंपनी को नोटिस जारी किए हैं।
नई तकनीक से बने थे फ्लैट, शुरुआत से ही आने लगीं शिकायतें
गुलमर्ग परिसर में लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत प्री-फेब्रिकेटेड सैंडविच पैनल और प्री-फेब्रिकेटेड स्ट्रक्चर तकनीक से पार्किंग सहित आठ मंजिला आवासीय इमारतें बनाई गई थीं। यहां वन बीएचके के कुल 1024 फ्लैट तैयार किए गए। इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के रूप में पेश किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अक्टूबर-2023 में इसका वर्चुअल शुभारंभ किया था। फ्लैट आवंटन और पजेशन के बाद से ही यहां तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं। स्थिति यह है कि सीपेज रोकने के लिए कई जगह केमिकल कोटिंग तक कराना पड़ी, लेकिन लीकेज बंद नहीं हुआ। निगम अधिकारियों ने भी तात्कालिक मरम्मत के प्रयास किए, मगर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
निगम बोला- निर्माण प्रक्रिया केंद्र सरकार के अधीन
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि देश के छह शहरों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इस प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया, निर्माण एजेंसी और तकनीकी कार्रवाई केंद्र सरकार स्तर से हुई थी। निगम को केवल आवंटन एजेंसी बनाया गया था। अधिकारियों के मुताबिक रहवासियों की शिकायतों के बाद मंत्रालय स्तर पर पत्राचार भी किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो
