एक घर में एक गैस कनेक्शन, अतिरिक्त सिलिंडर रखने पर होगी कार्रवाई, रसोई गैस के नियमों में कल से होगा बड़ा बदलाव
By Ashish Meena
मई 31, 2026
घरेलू रसोई गैस (LPG) के इस्तेमाल और सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और कड़ा विधिक फैसला लिया है। सरकार ने गैस कंट्रोल ऑर्डर (Gas Control Order) में बड़ा संशोधन करते हुए साफ कर दिया है कि अब देश के किसी भी एक घर (हाउसहोल्ड) में केवल एक ही एलपीजी कनेक्शन वैध माना जाएगा। एक से अधिक गैस कनेक्शन रखना अब पूरी तरह गैर-कानूनी और प्रतिबंधित होगा।
देश की तीनों प्रमुख सार्वजनिक तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने एक संयुक्त सार्वजनिक नोटिस जारी कर उपभोक्ताओं को चेताया है। सरकार 1 जून 2026 से इस नए विधिक नियम को पूरे देश में सख्ती से लागू करने जा रही है, जिससे पहले अतिरिक्त कनेक्शनों को सरेंडर करना अनिवार्य होगा।
क्या हैं नए नियम?
नए गैस कंट्रोल ऑर्डर के तहत ‘परिवार’ और ‘रसोई’ की विधिक परिभाषा को स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित कड़े नियम तय किए गए हैं:
सख्त परिभाषा: एक परिवार (जिसमें पति, पत्नी, अविवाहित/विवाहित बच्चे और आश्रित माता-पिता शामिल हैं) यदि एक ही रसोई का साझा इस्तेमाल करते हैं, तो उनके नाम पर केवल एक ही एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन अलॉट रहेगा।
सप्लाई होगी ब्लॉक: जिन उपभोक्ताओं के पास एक से अधिक कनेक्शन पाए जाएंगे, उनकी गैस सप्लाई तुरंत प्रभाव से ब्लॉक (बंद) कर दी जाएगी। यह सप्लाई कूट रूप से तभी बहाल होगी, जब उपभोक्ता अपने सभी अतिरिक्त कनेक्शनों को विधिक रूप से सरेंडर कर देगा।
मिलेगी डीबीसी (DBC) की सुविधा: यदि कोई उपभोक्ता स्वेच्छा से अपना अतिरिक्त कनेक्शन सरेंडर करता है, तो वह अपने बचे हुए इकलौते कनेक्शन को डबल बॉटल कनेक्शन (DBC) यानी दो सिलेंडरों वाले कनेक्शन में अपग्रेड करवा सकता है।
PNG उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव
शहरी इलाकों में जहां पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस (PNG) पहुंच चुकी है, वहां के उपभोक्ताओं के लिए सरकार ने नियमों को और कड़ा किया है, हालांकि इसमें एक व्यावहारिक विधिक छूट भी जोड़ी गई है।
सरेंडर या ट्रांसफर वाउचर की विधिक बाध्यता: जिन घरों में पीएनजी (PNG) कनेक्शन चालू हो चुका है, उन्हें अपना एलपीजी कनेक्शन रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नए संशोधन के तहत पीएनजी चालू होने के 30 दिनों के भीतर एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा।
हालांकि, उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए सरकार ने ‘टैपिंग या ट्रांसफर वाउचर’ का विकल्प दिया है। इसका फायदा यह होगा कि यदि भविष्य में उपभोक्ता किसी ऐसे क्षेत्र या शहर में शिफ्ट होता है जहां पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, तो वह इसी वाउचर के जरिए अपना एलपीजी कनेक्शन बिना किसी अतिरिक्त कूट शुल्क के दोबारा चालू (रिएक्टिव) करवा सकेगा।
आखिर क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, इस कड़े संशोधन के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
ब्लैक मार्केटिंग पर रोक: सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों के कमर्शियल इस्तेमाल, अवैध रीफिलिंग और ब्लैक मार्केटिंग (कालाबाजारी) के सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त करना।
जरूरतमंदों को लाभ: संपन्न परिवारों द्वारा ब्लॉक किए गए अतिरिक्त सिलेंडरों को कूट रूप से मुक्त कराकर ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के तहत देश के सुदूर और जरूरतमंद गरीब परिवारों तक नए कनेक्शन पहुंचाना।
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा: शहरी क्षेत्रों में पीएनजी जैसे सुरक्षित, निरंतर और स्वच्छ पाइपलाइन ईंधन के उपयोग को तेजी से बढ़ावा देना।
तीनों तेल कंपनियों ने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या असुविधा से बचने के लिए 1 जून की समय-सीमा से पहले अपने नजदीकी डीलर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अतिरिक्त गैस कनेक्शन सरेंडर करने की विधिक प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कर लें।
