ईरान और इजराइल जंग बढ़ी तो किल्लत होगी…भारत सरकार का तेल कंपनियों को प्रोडक्शन बढ़ाने का आदेश
By Ashish Meena
मार्च 7, 2026
मिडिल ईस्ट में बढ़ते ईरान-इजराइल तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इसी बीच भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए देश की सभी तेल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी यानी रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है।
सरकार का मानना है कि अगर ईरान-इजराइल के बीच युद्ध और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। इसका असर भारत में रसोई गैस की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। इस संभावित संकट से बचने के लिए सरकार पहले से ही तैयारी कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने गुरुवार देर रात इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए यह निर्देश जारी किया। इसमें साफ कहा गया है कि देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियां अब अपनी उपलब्ध गैसों का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर रसोई गैस बनाने में करें।
रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश
सरकार के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रिफाइनरी कंपनियां अब अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल केवल LPG यानी रसोई गैस बनाने में करेंगी। आमतौर पर इन गैसों का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल उद्योग और अन्य औद्योगिक कार्यों में भी किया जाता है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार ने निर्देश दिया है कि फिलहाल इन गैसों का उपयोग किसी अन्य क्षेत्र में न किया जाए। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में रसोई गैस की सप्लाई में किसी प्रकार की कमी न आए और आम लोगों को गैस सिलेंडर आसानी से मिलते रहें। भारत में करीब 33 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं। ऐसे में रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होने का असर सीधे करोड़ों परिवारों पर पड़ सकता है।
सरकार का दावा: भारत के पास पर्याप्त स्टॉक
सरकारी सूत्रों के अनुसार फिलहाल देश में ऊर्जा संसाधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार का कहना है कि भारत केवल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आने वाली सप्लाई पर निर्भर नहीं है। सरकार के मुताबिक भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ ही भारत दूसरे देशों से भी ऊर्जा सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ताकि अगर किसी क्षेत्र से सप्लाई बाधित हो जाए तो उसकी भरपाई दूसरे स्रोतों से की जा सके।
रूस से तेल आयात में बड़ी बढ़ोतरी
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में भी काम किया है। खास तौर पर रूस से कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ा है। 2022 में भारत अपनी कुल जरूरत का केवल 0.2 प्रतिशत तेल रूस से आयात करता था। लेकिन समय के साथ इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है। फरवरी 2025 तक भारत की कुल तेल जरूरत का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा रूस से आने लगा है**। रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी में भारत ने रूस से रोजाना करीब 10.4 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया। इससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में काफी मदद मिली है।
सरकारी कंपनियों को प्राथमिकता
सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन गैस की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी।
इन कंपनियों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC)
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL)
प्राइवेट कंपनियों पर पड़ सकता है असर
सरकार के इस फैसले का असर निजी क्षेत्र की कंपनियों पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल कई पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में भी किया जाता है। इनमें अल्काइलेट्स और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे उत्पाद शामिल हैं। अगर इन गैसों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन के बजाय LPG बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा तो इससे इन उत्पादों का उत्पादन कम हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस हर महीने औसतन चार अल्काइलेट्स कार्गो का निर्यात करती थी। ऐसे में सरकार के इस आदेश से उनके एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है।
कंपनियों के मुनाफे पर असर संभव
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। दरअसल पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमत बाजार में LPG के मुकाबले ज्यादा होती है। इसलिए कंपनियों को इन उत्पादों से अधिक लाभ मिलता है। लेकिन अब जब इन गैसों को LPG उत्पादन में इस्तेमाल करना होगा तो कंपनियों के मार्जिन कम हो सकते हैं। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि मौजूदा हालात में आम जनता की जरूरतों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
कतर से गैस सप्लाई में आई कमी
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर ने अपने LNG उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। ईरान के ड्रोन हमले के बाद कतर के LNG प्लांट में उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके कारण भारत आने वाले कई जहाजों की आवाजाही भी रुक गई है। भारत अपनी जरूरत की करीब 40 प्रतिशत LNG कतर से आयात करता है। यह मात्रा करीब 2.7 करोड़ टन प्रति वर्ष है। LNG को गैस में बदलकर ही भारत में CNG और PNG की सप्लाई की जाती है। इसलिए सप्लाई बाधित होने से गैस की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
CNG और PNG के दाम बढ़ने की आशंका
सिटी गैस कंपनियों ने भी इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्दी कम नहीं हुआ तो गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। LNG की सप्लाई कम होने से CNG और PNG की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। हालांकि सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और वैकल्पिक सप्लाई के विकल्प भी तलाश रही है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयात करने वाला देश है। देश में करोड़ों लोग खाना बनाने के लिए LPG सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बाद देश में LPG उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसलिए गैस की नियमित सप्लाई बनाए रखना सरकार के लिए बेहद जरूरी है।
यही वजह है कि सरकार किसी भी संभावित संकट से पहले ही तैयारी कर रही है।
