मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले बड़ा खेल! सरकार ने फंड पर लगाई रोक, जानिए कब होंगे चुनाव?

By Ashish Meena
मार्च 7, 2026

मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव से पहले सरकार के एक फैसले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगर निगम कमिश्नरों को पत्र जारी कर साफ कहा है कि आगामी बजट में महापौर निधि का कोई प्रावधान नहीं किया जाएगा। इस आदेश के बाद भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े नगर निगमों में चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक दल इस फैसले को चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं और इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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नगर निगम चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी

मध्य प्रदेश में नगर निगम चुनाव अगले साल होने की संभावना है। ऐसे में सरकार का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। नगरीय विकास विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि नगर निगम बजट बनाते समय महापौर निधि का प्रावधान नहीं किया जाए। विभाग ने यह भी कहा कि बजट तैयार करते समय मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 और नगर पालिक निगम (लेखा एवं वित्त) नियम 2018 का पालन करना अनिवार्य होगा। इस आदेश के बाद नगर निगम के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

महापौर निधि क्या होती है

महापौर निधि नगर निगम के बजट का वह हिस्सा होती है जिसका उपयोग महापौर अपने क्षेत्र में छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए कर सकते हैं। इस निधि के जरिए सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, पार्क और अन्य स्थानीय विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है। नगर निगमों में महापौर के अलावा पार्षद, एमआईसी सदस्य और जोन अध्यक्षों के लिए भी अलग-अलग निधि का प्रावधान किया जाता है। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलती है।

पिछले साल निधि को किया गया था दोगुना

भोपाल नगर निगम के पिछले बजट में महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों की निधि को दोगुना कर दिया गया था। पहले महापौर निधि 5 करोड़ रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इसी तरह नगर निगम अध्यक्ष की निधि 5 करोड़ रुपये, एमआईसी सदस्य की निधि 1 करोड़ रुपये और पार्षद की निधि 50 लाख रुपये तय की गई थी। जोन अध्यक्षों के लिए भी 10 लाख रुपये की निधि निर्धारित की गई थी। इस फैसले के बाद विपक्ष ने इसे जनता पर बोझ बताते हुए आलोचना की थी, क्योंकि उसी बजट में जल कर, संपत्ति कर और ठोस अपशिष्ट कर में भी वृद्धि की गई थी।

सरकार के आदेश में क्या कहा गया

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि नगर पालिक निगमों द्वारा अपने बजट में महापौर निधि का प्रावधान किया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के अध्याय 7 में नगर पालिक निधि के जो प्रावधान दिए गए हैं, उनमें महापौर निधि का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए बजट बनाते समय नियमों का पालन करना जरूरी है और महापौर निधि के लिए अलग से प्रावधान नहीं किया जा सकता।

भोपाल और इंदौर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

सरकार के इस आदेश का सबसे ज्यादा असर भोपाल और इंदौर जैसे बड़े नगर निगमों पर पड़ेगा। इन दोनों शहरों में महापौर निधि का उपयोग कई विकास कार्यों के लिए किया जाता रहा है। महापौर निधि बंद होने से कई छोटे विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों के लिए अन्य बजटीय प्रावधान उपलब्ध रहेंगे।

कांग्रेस ने उठाए सरकार के फैसले पर सवाल

इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। भोपाल नगर निगम के अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि नगर निगम एक लोकल सेल्फ गवर्नमेंट संस्था होती है और उसे अपने बजट में विभिन्न विकास कार्यों के लिए निधि तय करने का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि अगर पत्र में केवल महापौर निधि को ही हटाने की बात कही गई है, तो इसका गहन अध्ययन किया जाएगा। कांग्रेस ने इसे जनविरोधी फैसला बताया है और कहा है कि इससे स्थानीय विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

राजनीतिक नजरिए से क्यों अहम है यह फैसला

नगर निगम चुनाव से पहले महापौर निधि पर रोक को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले जनप्रतिनिधियों की निधि पर रोक लगाने से चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। नगर निगम चुनाव में महापौर और पार्षदों की भूमिका बेहद अहम होती है और विकास कार्यों के लिए मिलने वाली निधि उनके प्रभाव को भी तय करती है।

नगर निगम चुनाव कब हो सकते हैं

मध्य प्रदेश में नगर निगमों का कार्यकाल अगले साल समाप्त होने वाला है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर निगम चुनाव की घोषणा की जाएगी। आमतौर पर कार्यकाल समाप्त होने के बाद कुछ महीनों के भीतर चुनाव कराए जाते हैं। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि अगले साल के मध्य तक नगर निगम चुनाव हो सकते हैं। फिलहाल सरकार और राजनीतिक दल चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

स्थानीय विकास पर पड़ सकता है असर

महापौर निधि पर रोक लगने से स्थानीय स्तर पर होने वाले कई छोटे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। महापौर और पार्षद अक्सर अपने क्षेत्र में छोटी समस्याओं के समाधान के लिए इसी निधि का उपयोग करते थे। हालांकि सरकार का कहना है कि विकास कार्यों के लिए अन्य बजटीय प्रावधान उपलब्ध रहेंगे और विकास कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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