किसानों के लिए बड़ी राहत: भावांतर भुगतान योजना को मंजूरी, सरसों का दाम कम हुआ तो खाते में आएगा पैसा

By Ashish Meena
मार्च 13, 2026

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से किसान अपनी फसलों के सही दाम को लेकर परेशान रहते थे। कई बार बाजार में फसल का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से कम हो जाता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन अब सरकार के एक बड़े फैसले से किसानों की यह चिंता काफी हद तक कम हो सकती है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री के बीच हुई अहम बैठक में किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इस बैठक में भावांतर भुगतान योजना को मंजूरी देने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही अरहर की फसल को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। इन फैसलों से प्रदेश के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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भावांतर भुगतान योजना से किसानों को मिलेगा फायदा

सरकार ने मध्यप्रदेश के सरसों उत्पादक किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सके। कई बार बाजार में फसल का भाव MSP से कम हो जाता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।

भावांतर भुगतान योजना के तहत यदि बाजार में सरसों का भाव MSP से नीचे चला जाता है, तो सरकार उस अंतर की राशि किसानों को देगी। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। इससे किसानों को बाजार में कम कीमत मिलने पर भी नुकसान नहीं होगा।

इस योजना से खासकर उन किसानों को फायदा होगा जो बड़ी मात्रा में सरसों की खेती करते हैं। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय सुरक्षित रहेगी और उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा।

अरहर किसानों के लिए भी बड़ा फैसला

सरकार ने अरहर यानी तुअर की खेती करने वाले किसानों के लिए भी एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश में किसान जितनी भी अरहर पैदा करेंगे, सरकार उसकी 100 प्रतिशत खरीद करेगी। पहले सरकारी खरीद की एक सीमा तय होती थी, जिससे कई किसानों को अपनी फसल खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ती थी।

लेकिन अब सरकार ने तय किया है कि किसानों की पूरी अरहर फसल खरीदी जाएगी। इसका मतलब है कि किसानों को अपनी फसल बेचने को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। इससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के उन किसानों को बड़ा फायदा होगा जो अरहर की खेती करते हैं। इससे खेती को लेकर उनका भरोसा भी बढ़ेगा।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के किसानों को सबसे ज्यादा फायदा

मध्यप्रदेश में सरसों की खेती सबसे ज्यादा ग्वालियर-चंबल अंचल में होती है। इस क्षेत्र के कई जिले सरसों उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। भिंड, मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर, दतिया और शिवपुरी जैसे जिलों में सरसों की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है।

लेकिन जब बाजार में सरसों का भाव कम हो जाता है तो सबसे ज्यादा नुकसान इसी क्षेत्र के किसानों को होता है। कई बार किसानों को अपनी फसल कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। इसी वजह से भावांतर भुगतान योजना इन जिलों के किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इस योजना के लागू होने के बाद अगर बाजार में सरसों का भाव MSP से कम होता है तो किसानों को अंतर की राशि मिल जाएगी। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा।

किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश

सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लिया गया है। खेती में मौसम, बाजार और कई अन्य कारणों से जोखिम रहता है। ऐसे में अगर फसल का भाव कम हो जाता है तो किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

भावांतर भुगतान योजना किसानों को इस जोखिम से बचाने का एक प्रयास है। इससे किसानों को यह भरोसा मिलेगा कि अगर बाजार में कीमत कम भी हो जाती है तो उन्हें MSP के बराबर लाभ मिलेगा।

इसके अलावा अरहर की पूरी खरीद का फैसला भी किसानों के लिए राहत लेकर आया है। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी नहीं होगी और उन्हें उचित दाम मिल सकेगा।

कृषि क्षेत्र में सकारात्मक असर

सरकार के इन फैसलों से मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। जब किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलता है तो उनका खेती के प्रति भरोसा बढ़ता है। इससे किसान ज्यादा उत्साह के साथ खेती करते हैं।

भावांतर भुगतान योजना और अरहर की 100 प्रतिशत खरीद जैसे फैसले किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। साथ ही इससे प्रदेश में कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा मिल सकता है। किसानों का मानना है कि यदि ऐसी योजनाएं लगातार लागू होती रहें तो खेती को और मजबूत बनाया जा सकता है।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।