देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा…PM मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ की बैठक, इस स्थिति की तुलना कोरोना महामारी से की, कहा- आज फिर उसी जज्बे की जरूरत

By Ashish Meena
मार्च 27, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई अहम वर्चुअल बैठक अब खत्म हो गई है. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के खतरे को देखते हुए बुलाई गई यह बैठक करीब दो घंटे तक चली. इस बैठक का मकसद साफ था कि दुनिया में चाहे कितनी भी उथल-पुथल मचे, भारत में तेल, गैस और जरूरी सामानों की सप्लाई रुकनी नहीं चाहिए.

पीएम मोदी ने कुछ दिन पहले ही देश को आगाह किया था कि मिडिल ईस्ट का यह संकट भारत के लिए लंबी मुसीबतें खड़ी कर सकता है. केंद्र सरकार अपनी तरफ से हर मुमकिन कदम उठा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को कामयाब बनाने की असली जिम्मेदारी राज्यों के कंधों पर है. इसलिए, उन्होंने मुख्यमंत्रियों से अपील की है कि वे अपने-अपने राज्यों में ऐसी व्यवस्था करें जिससे आम आदमी की जरूरत की चीजों पर कोई आंच न आए. उन्होंने याद दिलाया कि जब देश संकट में होता है, तो केंद्र और राज्यों को मिलकर एक परिवार की तरह लड़ना पड़ता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्थिति की तुलना ठीक 6 साल पहले आई कोरोना महामारी से की है. उन्होंने कहा कि जिस तरह कोविड-19 के दौरान केंद्र और राज्यों ने ‘टीम इंडिया’ बनकर काम किया था, आज फिर उसी जज्बे की जरूरत है. आपको याद होगा कि मार्च 2020 में जब पूरी दुनिया थम गई थी, तब पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ लगातार मीटिंग्स का सिलसिला शुरू किया था. उस वक्त पहली मीटिंग 20 मार्च 2020 को हुई थी, जिसके ठीक चार दिन बाद देश में तीन हफ्ते का लॉकडाउन लगा था. उस मुश्किल दौर में उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा बार मुख्यमंत्रियों से बात की थी ताकि टेस्टिंग, ट्रैकिंग और इलाज में कोई कमी न रहे.

2021 में जब वैक्सीनेशन का दौर आया, तब भी पीएम मोदी ने संघीय ढांचे की मजबूती पर भरोसा जताया था. उन्होंने राज्यों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन देने का एलान किया था. उन्होंने साफ कहा था कि वैक्सीन पर किसी भी राज्य सरकार को एक पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. उस समय राज्यों ने भी राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र का साथ दिया था, जिसकी तारीफ पीएम मोदी ने खुद अपने एक लेख में भी की थी. उन्होंने इसे भागीदारी का एक नया मॉडल बताया था.

आज जब मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ने और सप्लाई चेन टूटने का डर सता रहा है, तो पीएम मोदी का राज्यों को पुकारना दिखाता है कि भारत की असली ताकत उसकी एकजुटता में है. ‘टीम इंडिया’ का यह नया मंत्र आज की बैठक में सबसे बड़ा हथियार बनने वाला है. सरकार की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट की आग की लपटें भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की रसोई तक न पहुंचें.

ईंधन और महंगाई पर मंथन जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में चल रही इस वर्चुअल बैठक में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हो सके हैं. इन 5 राज्यों में चुनाव की वजह से आचार संहिता लागू है, जिसके चलते वे इस चर्चा का हिस्सा नहीं बन पाए.

बाकी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ जारी इस बैठक में मिडिल ईस्ट के तनाव और ईरान युद्ध के बीच ईंधन की सप्लाई, बढ़ती महंगाई और रसद व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर गंभीर चर्चा हो रही है. मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों की स्थिति और तैयारियों की जानकारी पीएम मोदी को दे रहे हैं ताकि वैश्विक संकट का असर आम जनता पर न पड़े.

इस हाई-लेवल मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ देश के कई बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री भी जुड़े हुए हैं. बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय शामिल हैं. इनके अलावा दक्षिण भारत से चंद्रबाबू नायडू और रेवंत रेड्डी, जबकि पंजाब से भगवंत मान और जम्मू-कश्मीर से उमर अब्दुल्ला भी अपनी बात रख रहे हैं.

वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गुजरात के भूपेंद्र पटेल और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस भी चर्चा में हिस्सा लेकर अपने-अपने राज्यों की तैयारियों का ब्योरा दे रहे हैं. करीब दो घंटे तक चली प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्रियों की अहम बैठक खत्म हो गई है. इस बैठक में मिडिल ईस्ट संकट के बीच देश की सुरक्षा और रसद आपूर्ति पर विस्तार से चर्चा हुई.

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।