भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: संकट से निपटने के लिए RBI तैयार, 2013 की रणनीति को फिर लागू करने की तैयारी
By Ashish Meena
मई 22, 2026
ईरान-अमेरिका युद्ध के वैश्विक असर के चलते डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इस आर्थिक संकट से निपटने और रुपये को संभालने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अब 2013 की रणनीति को फिर से लागू करने की तैयारी में है।
RBI का पुराना मास्टर स्ट्रोक
दरअसल RBI के गवर्र संजय मल्होत्रा ने बताया है कि बैंक करेंसी को स्टेबल करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि, एडिशनल करेंसी की अदला-बदली और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे तरीकों पर विचार कर रहा है।
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क्या है टैपर टैंट्रम प्लेबुक?
जब अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बैंक जब बाजार में पैसा डालना बंद कर देता है, तब विदेशी निवेशक भारत जैसे देशों में पैसा डालना बंद कर देते हैं। जिससे रुपया कमजोर हो जाता है, शेयर बाजार में गिरावट आती है, डॉलर महंगा हो जाता है, भारत पर आर्थिक दबाव बनता है। ऐसी स्थिति साल 2013 में बनी थी, तब RBI ने ‘टैपर टैंट्रम प्लेबुक’ नीति अपनाई थी। इसमें RBI डॉलर को बेचकर रुपया संभालता है, ब्याज दरें बढ़ा देता है।
2013 में भी अपनाई थी यही रणनीति
गौरतलब है कि साल 2013 में जब देश ऐसे ही संकट में था, तब आरबीआई ने ‘टैपर टैंट्रम प्लेबुक’ नीति के तहत डॉलर बेचकर और ब्याज दरें बढ़ाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाया था। जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व बाजार में पैसा डालना बंद करता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे विकासशील देशों से हाथ खींच लेते हैं। इससे शेयर बाजार गिरता है और रुपया कमजोर होता है।
