खातेगांव: मुफ्त का राशन ले रहा भाजपा नेता और मैनेजर भाई, हरणगांव मंडल के महामंत्री और प्रभारी प्रबंधक पर गंभीर आरोप, SDM ने दिए जांच के आदेश

By Ashish Meena
जुलाई 25, 2026

मालवा जंक्शन, हरणगांव।
देवास जिले की खातेगांव तहसील के हरणगांव से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सेवा सहकारी संस्था मर्यादित हरणगांव के प्रभारी प्रबंधक और उनके भाजपा नेता भाई के पास करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और अंत्योदय अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन लेने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। सम्पन्नता के शिखर पर बैठे इन रसूखदार भाइयों द्वारा गरीबों के हक का मुफ्त राशन डकारने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

प्रभारी प्रबंधक गिरीश शुक्ला के नाम पर जारी हो रहा था राशन

प्राप्त ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार, सेवा सहकारी संस्था हरणगांव में वर्ष 2023 से प्रभारी प्रबंधक के पद पर कार्यरत गिरीश शुक्ला नियमित वेतन प्राप्त करने के बावजूद इस योजना का अनुचित लाभ ले रहे थे। उनके नाम पर हर महीने 30 किलो गेहूं, 5 किलो चावल और 1 किलो नमक लगातार जारी किया जा रहा था। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक, गिरीश और उनके भाई राजेश के नाम पर लगभग 1.66 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज थी, जिसका हाल ही में 15 मई 2026 को आपसी बंटवारा हुआ है। उनकी परिवार आईडी में पत्नी और पुत्र सहित कुल तीन सदस्य दर्ज हैं।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, इनका नाम पहले अंत्योदय अन्न योजना (एएवाय कार्ड धारक) के अंतर्गत दर्ज किया गया था, और बाद में खाद्यान्न पर्ची के माध्यम से राशन वितरण बदस्तूर जारी रहने का दावा किया जा रहा है। अपात्र होने के बावजूद सरकारी खाद्यान्न का यह उठाव अब प्रशासनिक जांच का एक मुख्य आधार बन गया है।

भाजपा नेता भाई भी ले रहे थे योजना का लाभ

इस पूरे प्रकरण में प्रभारी प्रबंधक गिरीश शुक्ला के बड़े भाई और भाजपा हरणगांव मंडल के महामंत्री राजेश शुक्ला की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि वे असंगठित एवं प्रवासी श्रमिक योजना में पंजीयन के आधार पर इस खाद्य सुरक्षा योजना का अनुचित लाभ ले रहे थे। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 4 सदस्यीय उनके परिवार के नाम पर हर महीने 16 किलो गेहूं, 4 किलो चावल और 1 किलो नमक का वितरण दर्ज है। रसूखदार पदों पर रहते हुए गरीबों के कोटे का राशन लेना आम जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

करोड़ों की चल-अचल संपत्ति और कृषि व्यवसाय के मालिक

जांच के दौरान दोनों भाइयों की वित्तीय स्थिति ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। हरणगांव में इन दोनों भाइयों के पास आलीशान तीन मंजिला मकान के अलावा अन्य स्थानों पर भी कई भूखंड (प्लॉट) और मकान मौजूद हैं। ये लोग करोड़ों की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं। इतना ही नहीं, इनका क्षेत्र में व्यावसायिक रूप से कृषि उपकरणों (ट्रैक्टर, थ्रेशर, प्लाऊ आदि) को किराए पर चलाने का बड़ा काम भी है। आर्थिक रूप से बेहद संपन्न होने के बावजूद गरीबों के लिए बनी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेना इनकी नैतिक और प्रशासनिक शुचिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

प्रबंधक की सफाई और एसडीएम के जांच के निर्देश

जब इस पूरे मामले पर प्रभारी प्रबंधक गिरीश शुक्ला से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि उनका नाम इस योजना में वर्ष 2013 से दर्ज है। उस समय उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, न तो उनके पास जमीन थी और न ही मकान। उन्होंने स्वीकार किया कि वे वर्ष 2023 से प्रभारी प्रबंधक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और यदि वर्तमान पात्रता मानदंडों के अनुसार वे इस योजना के दायरे में नहीं आते हैं, तो वे अपना नाम सूची से हटवा देंगे।

वहीं, इस गंभीर मामले को गंभीरता से लेते हुए खातेगांव एसडीएम प्रवीण प्रजापति ने बताया कि यह पूरा प्रकरण उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराने के लिए तहसीलदार और खाद्य विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम गठित कर दी है। एसडीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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