सीहोर जिले में क्लोरीन गैस का रिसाव, कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत, पेड़-पौधे तक झुलसे

By Ashish Meena
सितम्बर 11, 2026

मालवा जंक्शन, सीहोर।

सीहोर जिले के लसूड़िया खास गांव में काहिरी बांध के पास पानी फिल्टर प्लांट में गुरुवार-शुक्रवार की रात क्लोरीन गैस का रिसाव हो गया। बताया जा रहा है कि गैस के प्रभाव से आसपास के पेड़-पौधे तक झुलस गए हैं। टैंक में लीकेज के बाद गैस आसपास फैल गई। इससे ग्रामीणों और राहगीरों को आंखों में तेज जलन, घुटन, सांस लेने में परेशानी और उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। प्रभावित लोगों को सीहोर जिला अस्पताल लाया गया।

जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरिओम गुप्ता के मुताबिक, लसूड़िया खास से करीब 10 मरीज इलाज के लिए आपातकालीन कक्ष में पहुंचे। इनमें प्रेमजी, अनमोल, रामसभा, केसर सिंह और प्रेम सिंह को देर रात भर्ती किया गया। कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। भर्ती मरीजों में एक की हालत अधिक गंभीर बताई गई है।

सीएमओ बोले- तीनों सिलेंडर प्लांट से हटाए गए

नगर पालिका सीहोर के सीएमओ सुधीर सिंह ने बताया कि घटना के बाद ग्रासिम कंपनी नागदा की टेक्निकल टीम को मौके पर बुलाया गया। टीम ने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में रखे तीनों क्लोरीन सिलेंडर सावधानीपूर्वक ट्रक में रखकर प्लांट से हटा दिए। सीएमओ के मुताबिक, सिलेंडरों को तकनीकी टीम की निगरानी में हटाया गया, ताकि गैस रिसाव का खतरा न रहे। प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही है।

ग्रामीण बोले- गैस का असर पूरी तरह खत्म नहीं

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिल्टर प्लांट में अब लीकेज नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है। वहीं, ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्लांट के आसपास गैस का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि गैस के प्रभाव से आसपास के पेड़-पौधे झुलस रहे हैं। इसका असर मौके पर दिखाई दे रहा है और लोगों में अब भी चिंता बनी हुई है।

3 दिन में दूसरी बार गैस रिसाव, कार्रवाई अब तक नहीं

काहिरी डैम के पास ट्रीटमेंट प्लांट में तीन दिन में दो बार क्लोरीन गैस रिसाव की घटना सामने आ चुकी है। दो दिन पहले भी रात में रिसाव के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ी थी और उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया था। उस समय एसडीईआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी। रिसाव रोकने के लिए विशेषज्ञ नहीं होने पर गेल कंपनी की टीम बुलानी पड़ी थी। इसके बाद भी दोबारा ऐसी घटना रोकने के लिए प्लांट में क्या इंतजाम किए गए, यह स्पष्ट नहीं है।

पहली घटना के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था

पहली घटना के बाद विशेषज्ञों की मदद से रिसाव नियंत्रित किया गया था। इसके बावजूद प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी खामियों की स्थायी जांच नहीं हुई। दूसरी बार रिसाव के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को तत्काल इलाज की जरूरत पड़ी, लेकिन पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल उठे।

सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर उठे सवाल

वाटर फिल्टर प्लांट में क्लोरीन गैस के इस्तेमाल के बावजूद ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और रखरखाव में लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच, प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था की जांच और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।