शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता,सांदीपनि में शिक्षकों की सीधी एंट्री से उठे सवाल, बिना परीक्षा नियुक्ति, अतिशेष होने पर ही ट्रांसफर

By Ashish Meena
सितम्बर 19, 2026

अब परीक्षा देकर नहीं करनी होगी योग्यता साबित‎

सांदीपनि (पूर्व नाम सीएम राइज) स्कूलों में मर्ज हुई आसपास की स्कूलों के शिक्षकों को अब बिना कोई परीक्षा दिए सीधे यहां पढ़ाने का मौका मिलेगा।‎ लोक शिक्षण संचालनालय ने 15 सितंबर को इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किया है, जिसमें विभाग के 17 नवंबर 2025 के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि जो शिक्षक यहां रहना चाहेंगे, उन्हें रखा जाएगा; बाकी की काउंसिलिंग 25 सितंबर तक पूरी की जाएगी। खास बात‎ यह है कि 2021 में जब ये स्कूल शुरू हुए थे, तब यहां टिके रहने के लिए पदस्थ शिक्षकों को भी लिखित परीक्षा व इंटरव्यू पास करना पड़ा था, ताकि पढ़ाई का स्तर ऊंचा बना रहे।

प्रदेश में फिलहाल करीब 274 सांदीपनि स्कूल चल रहे हैं, जिन्हें सर्वसुविधायुक्त बनाकर बेहतर पढ़ाई का दावा किया गया है। मगर अब‎ स्कूल मर्ज होने के साथ शिक्षा की उच्च गुणवत्ता बनाए रखने की उसी शर्त से फिलहाल समझौता कर लिया गया है। यहां पढ़ाने के लिए शिक्षकों को अब परीक्षा देकर अपनी योग्यता साबित नहीं करनी होगी।‎

67 सांदीपनि स्कूलों में मर्ज हो चुके हैं 450 स्कूल‎

सरकार के मुताबिक, प्रदेश में शून्य नामांकन वाली शालाओं का “एक परिसर, एक शाला’ और सांदीपनि स्कूल व्यवस्था के तहत युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इसी कवायद के पहले चरण में करीब 450 स्कूल सिमटकर सिर्फ 67 सांदीपनि‎ विद्यालयों में समा गए हैं। यानी औसतन हर एक सांदीपनि स्कूल में आसपास की छह-सात पुरानी शालाएं मिला दी गई हैं। दूसरे चरण में भी यह विलय प्रक्रिया जारी है। नीति में मर्जर के लिए 3 किलोमीटर का दायरा तय है, लेकिन असल में इतने स्कूलों‎ को समेटने के लिए कई जगह बच्चों को 5 से 10 किलोमीटर तक दूर भेजा जा रहा है।‎

अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर मंडराया खतरा: कई सांदीपनि स्कूलों में अभी रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं। मर्जर के बाद जो नियमित शिक्षक अब यहां पहुंचेंगे, वे इन्हीं खाली पदों पर पदस्थ किए जाएंगे। इसका सीधा असर यह होगा कि इन पदों पर‎ पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की जगह नहीं बचेगी और उनकी नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। यानी नियमित शिक्षकों की पद स्थापना के बाद अतिथियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है।‎

25 सितंबर तक तय होगा कौन रुकेगा, कौन जाएगा‎

नए आदेश के अनुसार जो शिक्षक सांदीपनि में ही बने रहना चाहते हैं, उन्हें फिलहाल वहीं रखा जाएगा। लेकिन जो शिक्षक दूसरी स्कूल जाना चाहते हैं, उनकी काउंसिलिंग 25 सितंबर तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी बीच अगर किसी स्कूल में‎ जरूरत से ज्यादा शिक्षक पहुंच गए हैं, तो जिला स्तर की एक कमेटी तय करेगी कि किसे यहीं रखना है और किसे कहीं और भेजना है। यह फैसला बच्चों की नई दाखिला संख्या के आधार पर लिया जाएगा, न कि शिक्षक की काबिलियत के आधार पर।‎

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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