मध्यप्रदेश में बड़ा हादसा, किसान ने गेहूं में रखी थी सल्फास, जहरीली गैस फैलने से 2 बच्चों की मौत, महिला गंभीर
By Ashish Meena
मई 15, 2026
मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया तहसील अंतर्गत जेरठ पुलिस चौकी क्षेत्र में गेहूं की फसल बचाने के लिए किसान द्वारा फसल में रखी गई सल्फास की दुर्गंध से 2 बच्चों की मौत हो गई. वहीं, 1 महिला की हालत गंभीर है. सल्फास से गेहूं की फसल तो बच गई, लेकिन किसान को अपने दोनों बच्चों की जान से हाथ धोना पड़ गया.
एक ही कमरे में सो रहे थे दोनों बच्चे और महिलाएं
जेरठ निवासी दामोदर लोधी ने करीब 3-4 दिन पहले अपनी गेहूं की फसल में सल्फास की गोलियां डाल बोरियां भर के एक कमरे में रखी थीं. इस कमरे में दामोदर की बेटी करीब 11 वर्षीय भावना लोधी, उसकी पत्नी विनीता, उसकी देवरानी और छोटे भाई डोमन लोधी का बेटा 6 वर्षीय समीर लोधी उसी कमरे में सो रहे थे.
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डॉक्टर ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया
दामोदर लोधी की पत्नी विनीता को घबराहट हुई, तो वह अचानक चीखने लगी. इसके बाद परिजन का ध्यान उस तरफ गया, तो लोगों ने मौके पर पहुंचकर देखा कि दोनों बच्चे अचेत अवस्था में हैं. वहीं, दोनों महिलाओं की भी हालत खराब थी. सभी को अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल लाया गया. यहां पर डॉक्टर ने जांच के उपरांत भावना लोधी और उसके चचेरे भाई समीर को मृत घोषित कर दिया. जबकि एक महिला की हालत गंभीर होने के चलते उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
मामले की जांच में जुटी पुलिस
चौकी प्रभारी गोपाल सिंह ने बताया, “परिजनों से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक उन्होंने 3-4 दिन पहले सल्फास की गोलियां अनाज में डाली थीं. उसी की दुर्गंध आ रही थी, जिसके कारण दोनों बच्चे और महिला की हालत बिगड़ गई. जिसके बाद दोनों बच्चों की मौत हो गई. पुलिस मामले की जांच कर रही है.”
‘सावधानी से करें सल्फास के इस्तेमाल’
सेवानिवृत्त कृषि विस्तार अधिकारी विजय खरे ने बताया, “सल्फास का इस्तेमाल करने के पहले हाथ में दस्ताने पहनना चाहिए, मुंह पर मास्क लगाना चाहिए और पूरे शरीर को अच्छी तरह ढकना चाहिए. इसके अलावा जब बोरी में सल्फास रख दिया जाता है, तो उन सभी बोरियों को एक अच्छी पॉलिथीन से ढकना चाहिए. इसके बाद खाली डिब्बी, दस्ताने, मास्क और सर पर पहनी हुई टोपी को भी जमीन में गाड़ देना चाहिए, ताकि इसका दुष्प्रभाव न फैले. इसके बाद पूरे शरीर को अच्छी तरह साबुन से धोना चाहिए. इस बात की जानकारी समय-समय पर कृषि विभाग द्वारा किसानों को दी जाती है, लेकिन इसके बाद भी वे गलती करते हैं और इस तरह के हादसे सामने आते हैं.”
