युद्ध का असर…इस राज्य में पेट्रोल पंपों पर लटके ‘स्टॉक नहीं है’ के बोर्ड
By Ashish Meena
मई 14, 2026
वैश्विक स्तर पर चल रहे ईरान-इजरायल युद्ध की गूंज अब सीधे गुजरात के महीसागर जिले के आम जनजीवन पर सुनाई देने लगी है. जिले में पिछले कुछ दिनों से जारी ईंधन का संकट अब गहरा गया है. स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि जिले के मुख्य शहर लुणावाडा सहित कुल 62 पेट्रोल पंपों में से ज्यादातर पेट्रोल पंप पर ‘स्टॉक नहीं है’ के बोर्ड लटक गए हैं, जिससे वाहन चालकों में भारी अफरातफरी मची हुई है.
पंप संचालकों को ओर से ऑयल कंपनियों को एडवांस पेमेंट भेजा गया है और रजिस्ट्रेशन करवा दिया है, इसके बावजूद डिपो स्तर से सप्लाई में भारी कटौती की गई है. पिछले कई दिनों से जिले में ईंधन नहीं पहुंचा है. हालांकि, कंपनियों की ओर से आश्वासन दिया गया है कि आगामी दो-तीन दिनों में स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन तब तक जिले में ईंधन की भारी किल्लत बनी रहने की संभावना है.
वर्तमान में शादियों का सीजन चल रहा है, ऐसे में ईंधन न मिलने के कारण लोग एक पंप से दूसरे पंप के चक्कर काटने को मजबूर हैं. साथ ही, खेती का सीजन होने के कारण ट्रैक्टरों और सिंचाई पंपों के लिए डीजल की सख्त जरूरत है.
कडाणा, खानपुर, बालासिनोर और वीरपुर के बाद अब लुणावाडा में भी स्टॉक खत्म होने से किसान ओर आम इंसान बेहद चिंतित हैं. दूसरी ओर, पेट्रोल लेने के लिए लोग एक पंप से दूसरे पंप पर भटक रहे हैं, लेकिन पेट्रोल नहीं मिलने पर मायूस हो कर आगे दूसरे पेट्रोल पंप पर पेट्रोल मिलेगा ऐसी आश लगाए वहां भी जाते हैं, फिर भी पेट्रोल नहीं मिल रहा है.
पेट्रोल नहीं मिलने पर मायूस ग्राहक
जिले के मुख्य शहर लूनावाड़ा में पेट्रोल ओर डीजल की सप्लाई आने पर लंबी लाइन लग रही है, जिनमें बुजुर्ग भी पेट्रोल लेने के लिए लाइन में लगे हैं और आक्रोश में हैं. सरकार पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं.
पेट्रोल लेने के लिए लाइन खड़ा बुजुर्ग
ईंधन की तलाश में भटक रहे कई वाहन चालक पड़ोसी राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों (जैसे गुझावाड़ा) की ओर भी रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां से भी उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है. जानकारों का मानना है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो जिले का पूरा परिवहन तंत्र पूरी तरह से ठप हो सकता है.
