नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों की बदलेगी तस्वीर: CM मोहन यादव ने विकास से जोड़ने का उठाया बीड़ा
By Ashish Meena
अक्टूबर 29, 2026
मध्यप्रदेश से नक्सलवाद खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विकास की नई पहल कर रहे हैं। उन्होंने बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों को चिह्नित किया है। सीएम डॉ. यादव ने इन गांवों की जनता को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत उनके नेतृत्व में 26 और 28 अक्टूबर को प्रदेश के अधिकारी बैहर, बिरसा, लांजी और किरनापुर विकासखंड के गांवों में पहुंचे। अधिकारियों ने यहां ग्रामीणों से संवाद किया। इस दौरान ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकताओं, स्थानीय समस्याओं और विकास की संभावनाओं की जानकारी जुटाई गई। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और रोजगारमूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है।
नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों को चार क्लस्टर में विभाजित कर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भ्रमण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को 14 दिनों तक आवंटित गांवों का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं का आकलन करने, ग्रामीणों की जरूरतें समझने और विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका के अवसरों का विस्तार करना है।
चार विकासखंडों के गांवों में ग्रामीणों से संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों पर 26 अक्टूबर को लांजी एसडीएम आदित्य नारायण तिवारी के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने कट्टीपार, सतोना, बरगुड़ और देवरबेली गांवों का भ्रमण किया। बैहर एसडीएम अनिकेत शांडिल्य के नेतृत्व में अधिकारियों ने दड़ेकसा, बिलालकसा, सोनगुड्डा, लूद, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिठरी गांवों का दौरा किया। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री मनोज धुर्वे ने किरनापुर क्षेत्र के सीतापार और बोरवन गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा की। सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग शकुंतला डामोर ने उकवा-बिठली क्षेत्र के छात्रावासों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. घनश्याम परते, उप संचालक मत्स्योद्योग पूजा रोडगे और सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक जीपी बर्मन भी अपनी टीमों के साथ संबंधित क्षेत्रों में पहुंचे। इसी तरह 28 अक्टूबर को कलेक्टर आदित्य सिंह ने लांजी विकासखंड की ग्राम पंचायत देवरबेली के अंतर्गत आने वाले बरगुड़-सतोना, केराडीह, सायर और संदूका गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद किया। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने किरनापुर विकासखंड के छिंदीकुआ, बोरवन, सकरीटोला और सिरियाटोला गांवों में अधिकारियों के दल के साथ पहुंचकर स्थानीय आवश्यकताओं की जानकारी ली। वहीं अन्य विभागों के अधिकारियों ने बिरसा विकासखंड के अडोरी, कुंडेकसा और बोंदारी तथा बैहर विकासखंड के लातरी, बम्हनी और सारद गांवों का भ्रमण किया।
सड़क-पेयजल-शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं पर फोकस
अभियान के दौरान गांवों में सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, सिंचाई, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी भवन और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता और जरूरतों का आकलन किया जा रहा है। अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि किन सुविधाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है और किन समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं को मजबूत बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध शासकीय सुविधाओं की स्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक सुधार और अधोसंरचना विकास के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। विभिन्न शासकीय योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के लिए भी संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है।
रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल
जिला प्रशासन गांवों में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्यपालन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों की संभावनाएं तलाशने पर विशेष जोर दे रहा है। संबंधित विभागों के अधिकारियों को ग्रामीणों और युवाओं की रुचि तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप आजीविका के अवसर विकसित करने के लिए प्रकरण तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर
कलेक्टर आदित्य सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित 14 दिनों की अवधि में आवंटित गांवों का भ्रमण पूरा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रयास है कि नक्सल प्रभावित रहे इन 100 गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। साथ ही युवाओं और जनजातीय समुदाय के लोगों को शिक्षा, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
