खातेगांव: विधायक आशीष शर्मा ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, खरीफ ऋण जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग, किसानों को डिफाल्टर होने से बचाने की कवायद
By Ashish Meena
मार्च 24, 2026
Khategaon : देवास जिले की खातेगांव-कन्नोद विधानसभा से भाजपा विधायक आशीष शर्मा ने किसानों की व्यवहारिक समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर खरीफ फसल ऋण जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाने का पुरजोर अनुरोध किया है।
विधायक शर्मा ने मांग की है कि वर्तमान अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 को बढ़ाकर 20 मई 2026 किया जाए, ताकि प्रदेश के लाखों किसानों को बैंकिंग सिस्टम में ‘डिफाल्टर’ होने से बचाया जा सके।
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क्यों उठानी पड़ी तारीख बढ़ाने की मांग?
विधायक आशीष शर्मा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि प्रदेश के किसान खेती के लिए जिला सहकारी बैंकों से शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण लेते हैं। वर्ष 2025-26 के लिए इस कर्ज को चुकाने की अंतिम तारीख 28 मार्च तय है। लेकिन शासन द्वारा गेहूं उपार्जन (खरीदी) की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होना तय हुई है। छोटे और सीमांत किसानों के पास आय का मुख्य स्रोत उनकी फसल ही है। जब तक फसल बिकेगी नहीं, उनके पास कर्ज चुकाने के लिए नगद राशि उपलब्ध नहीं होगी।

डिफाल्टर होने का डर
यदि 28 मार्च तक ऋण जमा नहीं होता, तो बैंक किसानों को डिफाल्टर घोषित कर देंगे, जिससे उन्हें भविष्य में शून्य प्रतिशत ब्याज योजना का लाभ मिलने में भारी कठिनाई होगी।
विधायक आशीष शर्मा का तर्क: ‘किसान हित सर्वोपरि’
विधायक ने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि यदि तारीख नहीं बढ़ाई गई, तो किसान खाद-बीज के अगले चक्र के लिए कर्ज लेने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने विनम्र आग्रह किया है कि किसानों की इस वास्तविक समस्या को देखते हुए संशोधन कर नई तारीख 20 मई 2026 निर्धारित की जाए।
किसानों में उम्मीद की लहर
विधायक की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों में उम्मीद जगी है। किसानों का कहना है कि होली के त्यौहार और गेहूं की कटाई के बीच कर्ज चुकाने का दबाव उन पर मानसिक बोझ बना हुआ था। यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को बड़ी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
विधायक आशीष शर्मा का यह कदम सीधे तौर पर जमीनी स्तर के किसानों से जुड़ा हुआ है। अब गेंद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पाले में है। यदि मुख्यमंत्री इस अनुरोध को स्वीकार करते हैं, तो यह कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।
