सरकार का बड़ा फैसला, सोना-चांदी-प्लैटिनम की ज्वेलरी के आयात पर तत्काल प्रभाव से लगी पाबंदी
By Ashish Meena
अप्रैल 2, 2026
सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के कथित गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए एक अहम कदम उठाया है। बुधवार को जारी नए नियमों के तहत सोना, चांदी और प्लैटिनम से बने आभूषणों के आयात पर तुरंत प्रभाव से सख्त शर्तें लागू कर दी गई हैं। इस फैसले का उद्देश्य उन आयातकों पर नियंत्रण करना है जो नियमों का फायदा उठाकर सस्ते में कीमती धातुओं का आयात कर रहे थे।
आयात नीति में बड़ा बदलाव
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सीमा शुल्क वर्गीकरण के शीर्ष 7113 के अंतर्गत आने वाले इन आभूषणों की आयात नीति को ‘मुक्त’ से बदलकर ‘प्रतिबंधित’ कर दिया गया है। पहले जहां इनका आयात बिना किसी खास अनुमति के किया जा सकता था, अब इसके लिए डीजीएफटी से लाइसेंस या पहले से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यानी अब कोई भी व्यापारी बिना सरकारी मंजूरी के सोना, चांदी या प्लैटिनम के आभूषण आयात नहीं कर सकेगा।
पुराने सौदों पर भी लागू होंगे नियम
सरकार ने साफ कर दिया है कि ये नए नियम पहले से किए गए सौदों पर भी लागू होंगे। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यापारी ने पहले ही भुगतान कर दिया है या सौदा तय कर लिया है, तब भी उसे नए नियमों का पालन करना होगा। इतना ही नहीं, सरकार ने किसी भी तरह की संक्रमणकालीन (ट्रांजिशन) छूट देने से भी इनकार कर दिया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस मामले में सख्त रुख अपनाए हुए है।
किन्हें मिलेगी छूट
हालांकि, कुछ खास क्षेत्रों को इस प्रतिबंध से राहत दी गई है। 100 प्रतिशत निर्यात-उन्मुख इकाइयों (EOUs) और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में काम करने वाली कंपनियों पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसके अलावा, रत्न एवं आभूषण निर्यात से जुड़ी योजनाओं के तहत जो आयात होते हैं, उन्हें भी इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। यानी जो कंपनियां निर्यात के लिए काम कर रही हैं, उनकी गतिविधियों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
एफटीए के दुरुपयोग पर रोक
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ व्यापारी भारत-आसियान मुक्त व्यापार समझौते का गलत फायदा उठा रहे थे। इस समझौते के तहत कुछ वस्तुओं पर कम या शून्य शुल्क लगता है, जिसका लाभ उठाकर आयातक महंगे धातुओं को सस्ते में भारत ला रहे थे। खास तौर पर थाईलैंड जैसे देशों से बिना रत्न-पत्थर वाले आभूषण के नाम पर सोना और अन्य कीमती धातुएं आयात की जा रही थीं।
उद्योग की चिंता और सुझाव
उद्योग से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि सरकार का यह कदम सही दिशा में है, लेकिन लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि अगर प्रक्रिया जटिल होगी तो ईमानदार व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सरकार को पारदर्शी और तेज़ सिस्टम तैयार करना चाहिए ताकि असली कारोबारी प्रभावित न हों।
पहले भी उठाए गए ऐसे कदम
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह का कदम उठाया है। इससे पहले भी समय-समय पर प्लैटिनम और चांदी के आभूषणों के आयात पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के बीच वस्तुओं का व्यापार समझौता साल 2010 से लागू है, और तभी से इसके दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती रही हैं।
सरकार का यह कदम घरेलू उद्योग की सुरक्षा और व्यापार में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, इसका असर आयात कारोबार पर जरूर पड़ेगा, लेकिन अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया तो यह लंबे समय में बाजार को संतुलित करने में मददगार साबित हो सकता है।
