MP के कई जिलों में झमाझम बारिश-ओलावृष्टि का अलर्ट, बिजली गिरने से महिला की मौत, कई जगह ओले गिरे

By Ashish Meena
अप्रैल 2, 2026

मध्य प्रदेश में मौसम ने गुरुवार शाम को अचानक करवट ली। भोपाल में बादल छा गए, सागर में बारिश हुई। धार के कुक्षी में ओले गिरे। सीहोर में पंचायत वेब सीरीज की शूटिंग रोकनी पड़ी। मऊगंज में आकाशीय बिजली की चपेट में आकर महिला की मौत हो गई।

अगले कुछ घंटे के दौरान इंदौर, गुना, बैतूल, भिंड, धार, अलीराजपुर और बड़वानी में आकाशीय बिजली चमकने-गिरने के साथ तेज आंधी चलने, बारिश होने और ओले गिरने का अलर्ट है। सागर, खरगोन, राजगढ़, छिंदवाड़ा, विदिशा, अशोकनगर, देवास, झाबुआ में हल्की गरज के साथ बारिश होने की संभावना है।

मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रदेश में अभी एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और ट्रफ एक्टिव है। वहीं, प्रदेश के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में दो चक्रवात और सक्रिय हैं। इस वजह से आंधी, बारिश और ओले का दौर चल रहा है।

सीहोर में शूटिंग का सामान खराब

यूनिट के लाइन प्रोड्यूसर जीशान जाफरी ने बताया कि सीहोर के महोडीया गांव में सीजन-5 की शूटिंग 16 मार्च से 9 अप्रैल तक चलना है। इसमें करीब 200 लोग काम कर रहे हैं। गुरुवार को अचानक हुई बारिश और तेज हवा से टेंट समेत दूसरा सामान उड़ गया। भोजन भी खराब हो गया। हालांकि, इससे टीम का कोई सदस्य घायल नहीं हुआ है।

सागर में तेज हवा चली, बारिश हुई

सागर में गुरुवार को दिनभर धूप-छांव का दौर जारी रहा‌। शाम को घने बादल छा गए, फिर हल्की बूंदाबांदी शुरू हुई‌। वातावरण में उमस बढ़ गई। सानौधा और आसपास के इलाकों में तेज हवा चलने के बाद बारिश हुई।

धार में जोबट रोड ओलों से पटी

धार के ग्रामीण इलाकों में पानी गिरा। बाग तहसील के अखाड़ा, झिरपन्या, झाबा गांवों में गुरुवार शाम पांच बजे आंधी के साथ बारिश होने लगी। जोबट रोड ओलों से पट गई। मनावर में शाम 6 बजकर 40 मिनट पर तेज बारिश शुरू हो गई, जो शाम 7 बजकर 15 मिनट तक जारी रही।

मऊगंज में आकाशीय बिजली से महिला की मौत

मऊगंज के भलुहा गांव में 42 वर्षीय मनराजू पत्नी रामावतार प्रजापति खेत में गेहूं की फसल काट रही थी। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे तेज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरी। इसकी चपेट में आने से मनराजू की मौके पर ही मौत हो गई।

कल 9 जिलों में ओले गिरने, 33 जिलों में बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने शुक्रवार को 9 जिलों में ओले गिरने और 33 जिलों में बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। जिन जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी है, उनमें अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और सिवनी शामिल हैं। यहां ऑरेंज अलर्ट है।

वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, देवास, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सीहोर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला और बालाघाट में तेज आंधी चलने और बारिश होने का अलर्ट है।

अप्रैल के पहले सप्ताह में ऐसा ही मौसम

वर्तमान में प्रदेश में सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिल रही है। वहीं, 7 अप्रैल से एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भी सक्रिय होगा। इसकी वजह से 10 अप्रैल तक कहीं आंधी चलेगी तो कहीं बारिश हो सकती है। इसके बाद सिस्टम आगे लौट जाएगा और गर्मी का दौर शुरू होगा। दूसरे सप्ताह में तेज गर्मी पड़ेगी।

अप्रैल के आखिरी सप्ताह में ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी, नौगांव-खजुराहो में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। वहीं, दतिया, मुरैना, श्योपुर, बड़वानी, खरगोन, धार में बढ़ोतरी होगी। दरअसल, अप्रैल महीने में प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्से में भी गर्म हवाएं चलती हैं। इस वजह से यहां भीषण गर्मी पड़ती है।

अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी

जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मध्यप्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा था।

मार्च के आखिरी में टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट आई। इसी तरह अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम का असर मिला-जुला रहेगा।

अलग-अलग इलाकों में हीट वेव का आधार अलग

मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, तापमान सामान्य से 5°C ज्यादा होने पर हीट वेव मानी जाती है। मैदानी, पहाड़ी और तटीय इलाकों के लिए इसका आधार अलग होता है।

मैदानी इलाका- अधिकतम तापमान 40°C से ऊपर हो। मध्यप्रदेश में ज्यादातर मैदानी इलाका है, इसलिए 40 डिग्री के ऊपर हीट वेव की स्थिति बनती है। सीवियर हीट वेव में तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री अधिक रहता है। ग्वालियर-चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में ऐसी स्थिति बनती है।

फरवरी-मार्च में 4-4 बार बदला मौसम

इस साल जनवरी में बारिश नहीं हुई, लेकिन फरवरी और मार्च में 4-4 बार मौसम बदला। फरवरी में शुरुआत से ही दो बार ओले, बारिश और आंधी आई, जिससे फसलों को नुकसान हुआ। सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे कराया। 18 फरवरी से तीसरा दौर रहा, जिसका असर 19-21 फरवरी तक रहा। चौथा दौर 23-24 फरवरी को ओले-बारिश के रूप में आया।

मार्च में गर्मी की शुरुआत हुई। पहले पखवाड़े में तेज गर्मी रही। दूसरे पखवाड़े में बारिश शुरू हुई और एक दौर 4 दिन चला। इस दौरान 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश और 17 जिलों में ओले गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें बर्बाद हुईं।

तीसरा दौर 26-27 मार्च को रहा। 27 मार्च को सतना, रीवा, दतिया और भिंड में बारिश हुई। चित्रकूट में आंधी और बारिश से दीप सज्जा कार्यक्रम प्रभावित हुआ। चौथा दौर 29-30 मार्च को रहा। 30 मार्च को आधे प्रदेश में कहीं आंधी-बारिश और कहीं ओले गिरे।

 

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Ashish Meena

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।