भीषण सड़क हादसे में 11 लोगों की मौत, बोलेरो में 9 लोग जिंदा जले, बेटे का मुंडन कराकर लौट रहा था परिवार, कोई नहीं बचा
By Ashish Meena
अप्रैल 23, 2026
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में बुधवार रात सड़क हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। इसमें बोलेरो सवार 9 लोग जिंदा जल गए। हादसा रात 9.30 बजे मिर्जापुर-रीवा नेशनल हाईवे पर हुआ।
पुलिस के मुताबिक, एक तेज रफ्तार ट्रक अचानक ब्रेक फेल होने से बेकाबू हो गया। ट्रक ने आगे चल रही बोलेरो और स्विफ्ट कार को टक्कर मार दी। दोनों गाड़ियां आगे चल रहे एक ट्रॉले से जा टकरा गईं।
रफ्तार तेज होने की वजह से टक्कर के बाद बोलेरो उछलकर अलग हो गई। तेज धमाके के साथ उसमें आग लग गई। जबकि, स्विफ्ट कार ट्रक और ट्राले के बीच में फंस गई।
आग इतनी भीषण थी कि बोलेरो सवार 9 लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इसमें एक ही परिवार के 8 लोग और एक ड्राइवर था। करीब ढाई घंटे तक बोलेरो धू-धू कर जलती रही। मौके पर चीख पुकार मच गई। आसपास के लोग मदद के लिए आए, लेकिन आग तेज होने की वजह से कोई पास नहीं जा पाया।
लोग अंदर ही फंसे रहे। बाद में पुलिस और फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर काबू पाया गया। शव इतनी बुरी तरह से जल गए थे कि उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया। परिवार मैहर से 8 साल के बेटे का मुंडन कराकर लौट रहा था।
इसके अलावा स्विफ्ट कार के ड्राइवर और ट्रॉले के क्लीनर की भी मौत हो गई। हादसा ड्रमडगंज थाना क्षेत्र में हुआ। एसपी अपर्णा रजत कौशिक ने बताया- बोलेरो सवार सभी लोग जिगना थाना के नरैना गांव (मिर्जापुर) के रहने वाले थे। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू किया।
शिवा के पिता मुंडन के लिए परिवार के साथ नहीं गए थे
जिगना थाने नरैना निवासी अरुण सिंह को शादी के 7 साल बाद बेटा हुआ था। बुधवार को पत्नी बेटे शिवा को लेकर मुंडन कराने गई थीं। अरुण घर पर ही रुक गए थे।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- बोलेरो से लोग चिल्ला रहे थे
प्रत्यक्षदर्शी हंस लाल वर्मा ने बताया कि हम पंखा बनवाकर लौट रहे थे। जैसे ही घर की तरफ आए, तभी आगे सड़क पर एक गाड़ी जलती दिखी। हम पैदल टॉर्च लेकर आगे बढ़े तो देखा वहां पहले से कुछ बाइक सवार लोग खड़े थे। जैसे ही हम करीब पहुंचे, देखा कि गाड़ी में आग लगी हुई थी। आग बहुत तेज जल रही थी और गाड़ी साइड में लटकी हुई थी।
अंदर से एक लड़का चिल्ला रहा था, बाकी लोग भी चीख रहे थे। गाड़ी में टंकी से तेल रिस रहा था, जिससे आग और भड़क गई थी। आग इतनी तेज थी कि गाड़ी को बचाने का कोई मौका नहीं था। तभी मेरा छोटा भाई भी वहां पहुंच गया।
गाड़ी के अंदर के लोग कार का शीशा पीट रहे थे। जोर-जोर से चिल्ला रहे थे। बचाने की गुहार लगा रहे थे। एक लड़का और एक महिला गाड़ी के अंदर से ही मदद के लिए पुकार रही थी। हमने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, किसी तरह पकड़कर खींचा और थोड़ी दूर ले गए।
हमने आसपास से पानी ढूंढने की कोशिश की। 3-4 गाड़ियों से पानी मांगा। एक छोटी गाड़ी में बैठी महिला ने बोतल में थोड़ा-थोड़ा पानी दिया। हमने डिब्बों में पानी लेकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही पानी डालते, आग और भड़क जाती।
2-3 डिब्बा पानी डालने के बाद भी आग पर कोई काबू नहीं पाया जा सका। वहां न तो कोई प्रशासन पहुंचा था, न एंबुलेंस और न ही मदद के लिए कोई और लोग। हालात इतने खराब थे कि देखते ही देखते लोगों की जान चली गई।
