सिंहस्थ से पहले संवरेगी महाकाल की नगरी, उज्जैन में लगेंगे 10 लाख पौधे, बनेगा 114 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर

By Ashish Meena
जुलाई 7, 2026

मालवा जंक्शन, उज्जैन।
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस बार प्रशासन और वन विभाग की प्राथमिकता केवल व्यवस्थाएं नहीं हैं। पर्यावरण संरक्षण को भी योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। सिंहस्थ को देश का पहला ग्रीन सिंहस्थ बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। इसके लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा। योजना का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए आने वाले वर्षों में पर्यावरण संतुलन को भी मजबूत करना है।

114 किलोमीटर का बनेगा ग्रीन कॉरिडोर

वन विभाग ने सिंहस्थ क्षेत्र और उससे जुड़े प्रमुख मार्गों की पहचान की है। इन मार्गों पर बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाएंगे। जानकारी के अनुसार करीब 114 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर श्रद्धालुओं और यात्रियों को हरित वातावरण उपलब्ध कराएगा।

ग्रीन कॉरिडोर सिंहस्थ के प्रमुख मार्गों को जोड़ने का काम करेगा। इससे पूरे क्षेत्र की सुंदरता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान पर्यावरणीय दबाव बढ़ता है। ऐसे में यह पहल संतुलन बनाने में मदद करेगी।

10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य

वन विभाग ने बड़े स्तर पर पौधारोपण की योजना बनाई है। इसके तहत करीब 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। पौधारोपण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगा। पौधों की देखरेख और संरक्षण की भी व्यवस्था बनाई जाएगी। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पौधों का चयन किया जाएगा। ऐसे पौधों को प्राथमिकता मिलेगी जो लंबे समय तक जीवित रह सकें। इसके साथ ही छायादार और पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों को भी शामिल किया जाएगा।

जियो टैगिंग से होगी निगरानी

इस अभियान की सबसे खास बात जियो टैगिंग होगी। लगाए जाने वाले पौधों को डिजिटल तकनीक से जोड़ा जाएगा। हर पौधे का स्थान रिकॉर्ड किया जाएगा। इससे उसकी निगरानी आसान होगी। किस क्षेत्र में कितने पौधे लगे हैं, इसकी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध रहेगी। इससे पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी तय होगी। जियो टैगिंग के कारण पौधारोपण अभियान की वास्तविक स्थिति का आकलन भी किया जा सकेगा।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

सिंहस्थ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसमें देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी का असर पर्यावरण पर भी पड़ता है। इसी कारण इस बार पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि आयोजन के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया जाए। इससे धार्मिक आयोजन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी दोनों साथ चल सकें।

शहर की हरियाली बढ़ाने पर फोकस

ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य केवल सिंहस्थ तक सीमित नहीं है। इससे उज्जैन शहर की हरियाली भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर पर पौधारोपण से तापमान नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इससे धूल और प्रदूषण भी कम हो सकता है। सिंहस्थ के बाद भी यह हरित क्षेत्र शहर की पर्यावरणीय जरूरतों को पूरा करेगा। स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।

अधिकारियों का क्या कहना है

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है। पौधारोपण, संरक्षण और जियो टैगिंग को एक साथ लागू किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं है। पौधों की जीवित रहने की दर बढ़ाना भी प्राथमिकता होगी।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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