खातेगांव: गांववालों की मुसीबत बनी नई सड़क, घरों में भर गया 2 फीट तक पानी, ग्रामीणों ने खोद डाली 4 करोड़ की सड़क

By Ashish Meena
जुलाई 27, 2026

मालवा जंक्शन, खातेगांव।
देवास जिले की खातेगांव तहसील के ग्राम पटरानी से खिवनी के रीछी खो गेट तक बन रही सड़क ग्रामीणों के लिए राहत के बजाय मुसीबत बन गई है। निर्माण एजेंसी द्वारा जल निकासी के लिए आवश्यक स्थानों पर सीमेंट पाइप और पुलिया नहीं बनाने के कारण पहली ही तेज बारिश में कई घरों में दो फीट तक पानी भर गया। ग्रामीणों ने अब मुआवजे की मांग करते हुए निर्माण रोकने की चेतावनी दी है।

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा पटरानी से रीछी खो तक लगभग 5.20 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण 4 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जा रहा है। इस सड़क का भूमिपूजन 5 जुलाई 2025 को केंद्रीय कृषि मंत्री एवं सांसद शिवराज सिंह चौहान ने किया था।

ग्रामीण सुरेश बारेला और मेहर सिंह बारेला ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान ही उन्होंने ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों को कई बार चेताया था कि सड़क की ऊंचाई बढ़ने से पानी की निकासी प्रभावित होगी। उन्होंने उचित स्थानों पर सीमेंट पाइप या पुलिया बनाने की मांग भी की थी, लेकिन उनकी बातों को अनदेखा कर दिया गया।

नतीजतन, तेज बारिश के बाद पानी गांव की ओर लौट आया और कई घरों में घुस गया। रातभर हुई बारिश के बाद घरों में करीब दो फीट तक पानी भर गया। इससे गेहूं, चना, मक्का की फसल के लिए खरीदी गई यूरिया खाद सहित गृहस्थी का सामान खराब हो गया।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि ग्रामीणों को आधी रात में खुद सड़क काटकर पानी की निकासी करनी पड़ी। इससे सड़क मार्ग बंद हो गया है। अब लोग लकड़ी के पटिए और बिजली के पोल के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। स्कूली बच्चों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ रहा है, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है।

क्या कहते हैं ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी सड़क अधूरी पड़ी है। सड़क पर बिखरी गिट्टी के कारण रोजाना आवागमन में परेशानी हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक नुकसान की भरपाई और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक सड़क का आगे का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क वर्षों पुरानी मांग थी। विधानसभा चुनाव के दौरान 17 नवंबर 2023 को ग्रामीणों ने सड़क नहीं बनने के विरोध में मतदान का बहिष्कार कर दिया था। दोपहर तीन बजे तक गांव का एक भी मतदाता मतदान केंद्र नहीं पहुंचा। बाद में तत्कालीन जनपद सीईओ केपी राजोरिया, तहसीलदार मनीष जैन और तत्कालीन कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने ग्रामीणों से चर्चा की। कलेक्टर ने वीडियो कॉल के माध्यम से सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण मतदान के लिए तैयार हुए।

जिम्मेदार बोले

पीडब्ल्यूडी के सब इंजीनियर पुरुषोत्तम कनेरिया ने बताया कि जिस स्थान पर ग्रामीणों ने सड़क काटकर पानी निकाला, वहां निरीक्षण किया गया है। जांच में उस स्थान पर सीमेंट पाइप की आवश्यकता पाई गई है। जल्द ही वहां पाइप डलवाकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कर दी जाएगी।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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