देवास में वक्फ बोर्ड की 100 करोड़ की जमीन मामले में नया मोड़, खरीदार आशीष खंडेलवाल बोले- जमीन वक्फ की नहीं, 100 साल से काजी परिवार के नाम, काजी इरफान अशरफी और विजय भट्ट पर उठे सवाल
By Ashish Meena
सितम्बर 29, 2026
देवास में वक्फ बोर्ड की ₹100 करोड़ कीमत की 5 हेक्टेयर जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले में एक नया मोड़ आ गया है। जमीन के खरीदार आशीष खंडेलवाल ने वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज करते हुए इसे 100 वर्षों से काजी परिवार की निजी संपत्ति बताया है। वहीं, इस पूरे सौदे की परतें खुलने के साथ ही काजी इरफान अहमद अशरफी, कथित विवादित कॉलोनाइजर विजय भट्ट और एवी इन्फ्रा के पार्टनर्स की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
12 साल पहले शुरू हुआ सौदा: ₹50 लाख नकद लेनदेन का भी खुलासा
जांच में सामने आया है कि इस जमीन का पहला एग्रीमेंट 11 जून 2015 को काजी इरफान अहमद अशरफी और ‘यूवी डेवकॉन’ कंपनी के बीच हुआ था। इसके तहत ‘ओशियन सिटी’ नाम से कॉलोनी विकसित करने का सौदा तय हुआ था, जिसमें 60 प्रतिशत हिस्सा काजी इरफान अहमद और 40 प्रतिशत हिस्सा यूवी डेवकॉन के पार्टनर्स का तय किया गया था।
जमीन विकास के एवज में काजी इरफान अशरफी को चार किस्तों में ₹50 लाख चेक से दिए गए थे, जबकि ₹50 लाख नकद (Cash) देने की बात भी सामने आई है, जिसका उल्लेख एग्रीमेंट में नहीं था। इस जमीन पर धोखाधड़ी के मामलों में घिरे विजय भट्ट की नजर 12 साल पहले पड़ी थी। लंबे समय तक विकास कार्य न होने के बाद पिछले साल अगस्त में जमीन की रजिस्ट्री ‘एवी इन्फ्रा’ (AV Infra) के नाम कराई गई, जिसमें विजय भट्ट का बेटा अनुत्तम भट्ट और आशीष खंडेलवाल पार्टनर हैं। यह रजिस्ट्री ₹5 करोड़ 65 लाख में दिखाई गई है।
खरीदार का पक्ष: ‘निचली अदालत से हमारे पक्ष में आया फैसला’
मामले में आरोपी बनाए गए और एवी इन्फ्रा के पार्टनर आशीष खंडेलवाल ने वक्फ बोर्ड के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा:
-
100 साल का रिकॉर्ड: “हमने सभी राजस्व दस्तावेज देखने के बाद ही जमीन खरीदी है। सरकारी रिकॉर्ड में 100 वर्षों से काजी इरफान अहमद अशरफी के परिवार का ही नाम दर्ज है। यदि जमीन वक्फ बोर्ड की थी, तो उन्होंने इतने सालों में अपना नाम दर्ज क्यों नहीं कराया?”
-
कानूनी स्थिति: “वक्फ बोर्ड के दावे के बाद निचली अदालत से फैसला हमारे पक्ष में आ चुका है। वर्तमान में यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है। हमने जमीन की पूरी राशि बैंक खातों (बैंकिंग माध्यम) से चुकाई है।”
-
NOC प्राप्त: “हमने देवास विकास प्राधिकरण (DDA) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया है। कलेक्टर जांच में भी प्रक्रिया सही पाई गई थी, इसके बावजूद वक्फ बोर्ड अब बेबुनियाद हस्तक्षेप कर रहा है।”
कोर्ट के रुख पर टिकी नजरें
वक्फ बोर्ड के सदस्य मनोज मालपानी की शिकायत और कलेक्टर द्वारा नामांतरण (Mutation) रोकने के बाद अब मामला हाईकोर्ट के फैसले पर टिका हुआ है। एक तरफ जहां प्रशासन और वक्फ बोर्ड इसे सरकारी/वक्फ संपत्ति की हेराफेरी मान रहे हैं, वहीं खरीदार पक्ष इसे निजी जमीन का वैध सौदा बता रहा है।
