खातेगांव टीआई हत्याकांड से खुला शराब तस्करी का सिंडिकेट, हरदा से गुजरात तक फैला था करोड़ों का काला कारोबार, हर ट्रक की तस्करी पर होती थी 10 लाख तक की कमाई, पुलिस जांच में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे

By Ashish Meena
नवम्बर 4, 2026

मालवा जंक्शन, खातेगांव।
देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी (टीआई) दिलीप कुमार पुरी को कुचलने वाला ट्रक अवैध शराब की बड़ी खेप लेकर गुजरात जा रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि इस तस्करी के तार हरदा से लेकर गुजरात तक फैले करोड़ों रुपये के एक सुसंगठित सिंडिकेट से जुड़े हुए थे। इस पूरे अवैध कारोबार की शुरुआत हरदा जिले के टिमरनी क्षेत्र स्थित तीन लाइसेंसी शराब दुकानों—सोडलपुर रोड, हरदा रोड और रहटगांव से होती थी।

कागजों में इन दुकानों के लाइसेंस पाटेन्द्र जायसवाल के नाम पर दर्ज थे, लेकिन असल में इस पूरे काले कारोबार का संचालन चार पार्टनर मिलकर कर रहे थे। ‘थ्री-लेयर सिक्योरिटी’ के बीच कागजों में पूरी तरह वैध दिखने वाले शराब के स्टॉक को बेहद शातिराना तरीके से अवैध रूप से गुजरात भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि शराब से भरे हर ट्रक की तस्करी पर सिंडिकेट को 8 से 10 लाख रुपये तक की सीधी कमाई होती थी।

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4 पार्टनर चलाते थे सिंडिकेट, तय था कमाई का प्रतिशत

पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरे शराब सिंडिकेट का मुख्य सरगना और संचालक राहुल जायसवाल था। राहुल ही टिमरनी की दुकानों से शराब का स्टॉक उठाने, तस्करी का रूट तय करने और मिलने वाली रकम का पूरा हिसाब-किताब रखता था। तस्करी से मिलने वाला सारा पैसा सबसे पहले राहुल के पास ही जमा होता था, जिसे बाद में सभी पार्टनर्स में पूर्व-निर्धारित हिस्सेदारी के तहत बांट दिया जाता था। हिसाब के मुताबिक, मुख्य संचालक राहुल, मनीष और मोहिन जायसवाल को 30-30 प्रतिशत का बड़ा हिस्सा मिलता था, जबकि केवल नाममात्र के लाइसेंसधारक पाटेन्द्र जायसवाल को 10 प्रतिशत का कमीशन दिया जाता था।

1,400 पेटियां शराब और 10 लाख रुपये तक का मुनाफा

खातेगांव में चेकिंग के दौरान जिस आयशर ट्रक को जब्त किया गया है, उसमें करीब 1,400 पेटियां शराब लदी हुई थीं। यह पूरी खेप टिमरनी की सोडलपुर रोड स्थित शराब दुकान से लोड की गई थी, जिसे देवास और इंदौर के रास्ते करीब 700 किलोमीटर दूर शुष्क राज्य गुजरात पहुंचाया जाना था। शराब कारोबार से जुड़े जानकारों के अनुसार, गुजरात में शराबबंदी के कारण वहां शराब की भारी मांग रहती है। मध्य प्रदेश से कम कीमत पर खरीदी गई शराब को गुजरात के अवैध बाजार में कई गुना ऊंचे दामों पर बेचा जाता था, जिससे एक ही ट्रक सीमा पार कराने पर तस्करों को 8 से 10 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा होता था।

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3-लेयर सिक्योरिटी और फर्जी दस्तावेजों का खेल

आबकारी नियमों के तहत हर लाइसेंसी दुकान का स्टॉक, बिक्री और परिवहन क्षेत्र तय होता है। हालांकि, यह सिंडिकेट आबकारी नियमों को ताक पर रखकर दुकानों से वैध स्टॉक उठाता था और फर्जी दस्तावेजों या बिना किसी वैध परमिट के उसे निर्धारित क्षेत्र से बाहर भेज देता था। रास्ते में पुलिस और आबकारी की चेकिंग से बचने के लिए तस्करों ने 3-लेयर का सुरक्षा घेरा बना रखा था, जिसमें आगे-आगे चलने वाले मुखबिरों (रेकी करने वालों) का मजबूत नेटवर्क शामिल था। कई बार ट्रकों की पहचान छिपाने के लिए शराब के ऊपर अन्य घरेलू सामान या माल लाद दिया जाता था।

19 महीने पहले भी पकड़ी गई थी इसी दुकान की शराब

टिमरनी की शराब दुकानों से तस्करी का यह कोई पहला मामला नहीं है। ठीक 19 महीने पहले, 1 मार्च को टिमरनी पुलिस ने इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे पर सुदामा होटल के पास एक ट्रक पकड़ा था, जिसमें 23.60 लाख रुपये मूल्य की ‘गोवा व्हिस्की’ की 361 पेटियां (4,332 बोतलें) जब्त की गई थीं। उस समय भी तार टिमरनी से जुड़े थे। अब ताजा मामले में जब्त शराब पर मिले ‘बैच नंबर 025’ ने एक बार फिर टिमरनी की इसी दुकान को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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13 आरोपी हिरासत में, 3 अफसर निलंबित और 1 करोड़ की सहायता

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने टिमरनी की तीनों शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर उन्हें सील कर दिया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 13 आरोपियों को हिरासत में लिया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) उपेंद्र जैन ने बताया कि पूरे तस्करी नेटवर्क की पहचान कर ली गई है और इसमें शामिल अन्य चेहरों को भी जल्द बेनकाब किया जाएगा।

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लापरवाही बरतने पर हरदा के सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमरसिंह बघेल और दो आरक्षकों (अरुण कुम्बारे व कृष्णपाल सिंह डोडिया) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहीद टीआई दिलीप पुरी की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति के तहत सब-इंस्पेक्टर (SI) का पद देने और परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने का ऐलान किया है।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।