मिडिल ईस्ट तनाव का असर…दुबई का रियल एस्टेट बाजार बेहाल, कोविड के बाद पहली बार गिरे घरों के दाम

By Ashish Meena
अप्रैल 24, 2026

कोरोना महामारी के बाद पहली बार दुबई के रियल एस्टेट बाजार में गिरावट का रुख देखा गया है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ValuStrat होम प्राइस इंडेक्स में मार्च महीने के दौरान 5.9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो साल 2020 के बाद कीमतों में आई पहली गिरावट है.

लंबे समय तक दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी बाजारों में शुमार रहने के बाद, अब विदेशी निवेशकों और अमीर प्रवासियों की मांग में कमी आई है, जिसका मुख्य कारण क्षेत्रीय संघर्ष और बदलती भू-राजनीतिक स्थितियां मानी जा रही हैं. हालांकि, इस हालिया गिरावट के बावजूद बाजार अभी भी उन स्तरों पर बना हुआ है जो छह महीने पहले देखे गए थे. कीमतों में आया यह बदलाव निवेशकों के बीच बढ़ती सावधानी और बाजार के एक नए दौर की ओर संकेत करता है.

दुबई अपनी टैक्स-मुक्त व्यवस्था के कारण लंबे समय से प्रवासियों और विदेशी पूंजी के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है एक लंबी मंदी के बाद, साल 2020 से अब तक यहां घरों की कीमतों में 70 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि देखी गई है. हालांकि, अब भू-राजनीतिक तनाव इस तेजी की कड़ी परीक्षा ले रहे हैं. खाड़ी देशों को हाल ही में ईरान द्वारा की गई जवाबी सैन्य कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा है, जिसके बाद इसी महीने की शुरुआत से एक अस्थिर संघर्षविराम प्रभावी हुआ है.

मार्च के महीने में सबसे ज्यादा नुकसान

दुबई भूमि विभाग के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली संस्था ‘REIDIN’ के अनुसार, मार्च महीने में आवासीय संपत्तियों की बिक्री का मूल्य फरवरी की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत गिरकर 37.2 बिलियन दिरहम ($10.1 बिलियन) रह गया है. इस दौरान लेनदेन की संख्या भी लगभग 16,000 से घटकर करीब 13,000 पर आ गई है.

हालांकि, ‘बेटरहोम्स’ और ‘ValuStrat’ जैसी संस्थाओं का मानना है कि मार्च में आई इस गिरावट के पीछे ईद-उल-फितर की छुट्टियां और यूएई में हुई भारी बारिश भी बड़े कारण हो सकते हैं, जिससे बाजार की गतिविधियों में सुस्ती आई.

दुबई ने ‘गोल्डन वीजा’ की ऑफर करके खुद को एक अस्थायी पड़ाव के बजाय एक स्थायी निवास के केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा है. इसका उद्देश्य विदेशियों को यहां बसने के लिए आकर्षित करना और प्रॉपर्टी बाजार की मजबूती को बनाए रखना है. रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद दुबई में प्रॉपर्टी कंपनियां अब शुरुआती गिरावट से उबर रही हैं.

दुबई का रियल एस्टेट बाजार साल 2009 में डिफॉल्ट के करीब पहुंच गया था, जब ‘ऑफ-प्लान’ बाजार के गिरने से बड़ी मंदी आई थी. मौजूदा बाजार में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत है, और REIDIN के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में इसके बिक्री मूल्य में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है.

डेन्यूब प्रॉपर्टीज के संस्थापक रिज़वान साजन के अनुसार, यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) लंबे समय तक बंद रहता है, तो डेवलपर्स को निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ सकता है. इस बीच, कई प्रमुख डेवलपर्स ने निवेशकों के साथ बैठकें की हैं ताकि लिक्विडिटी से जुड़ी चिंताओं को दूर किया जा सके.

बाजार में नए प्रोजेक्ट्स का आना जारी है. एम्आर (Emaar), अजीजी डेवलपमेंट्स और डेन्यूब जैसे डेवलपर्स लगातार नई योजनाएं लॉन्च कर रहे हैं. मांग को बनाए रखने के लिए ये कंपनियां खरीदारों को कम ‘अपफ्रंट पेमेंट’ जैसे आकर्षक ऑफर और प्रोत्साहन भी दे रही हैं. समाना डेवलपर्स के सीईओ इमरान फारूक का कहना है कि बिक्री की रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी जरूर हुई है, लेकिन काम रुका नहीं है. उन्होंने बताया कि अभी भी यूएई के भीतर से और भारत व मिस्र जैसे देशों से खरीदार निवेश कर रहे हैं.

आगे ये भी पढ़ें :
Ashish Meena

Ashish Meena

ashish-meena

आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।