खातेगांव: आमला में अंबे माता मंदिर पर विशाल भंडारा, भीषण गर्मी के बीच प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे हजारों श्रद्धालु, विधायक आशीष शर्मा ने की बड़ी घोषणा
By Ashish Meena
मई 7, 2026
Amla Ambe Mata : आस्था जब चरम पर हो, तो भीषण गर्मी भी भक्तों के कदमों को नहीं रोक पाती। ऐसा ही कुछ नजारा देवास जिले की खातेगांव तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम आमला-विक्रमपुर और सागोनिया के बीच स्थित पहाड़ी पर देखने को मिला। यहाँ अंबे माता मंदिर में आयोजित 30वें वार्षिक विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और प्रसादी ग्रहण की।
पंडित गोपाल शर्मा ने किया दिव्य श्रृंगार
बुधवार को आयोजित भंडारे की शुरुआत माता रानी के विशेष श्रृंगार से हुई। पंडित गोपाल शर्मा ने अंबे माता की प्रतिमा का मनमोहक और दिव्य श्रृंगार किया, जिसे देखने के लिए सुबह से ही भक्तों की कतारें लग गईं। आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस भंडारे के लिए पिछले एक महीने से तैयारियां चल रही थीं।
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विधायक आशीष शर्मा ने की बड़ी घोषणा
इस पावन अवसर पर क्षेत्रीय विधायक आशीष शर्मा ने भी शिरकत की। उन्होंने आम भक्तों के साथ बैठकर भोजन प्रसादी ग्रहण की और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टीनशेड निर्माण हेतु 50 हजार रुपये देने की घोषणा की। विधायक ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता और आस्था को मजबूती प्रदान करते हैं।
भीषण गर्मी पर भारी पड़ी ‘आस्था’
तापमान के बढ़ते पारे और चिलचिलाती धूप के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। आयोजन समिति के सदस्य दिनेश पटेल, कैलाश मीणा और ओमप्रकाश टांक ने बताया कि भंडारे से पूर्व मंगलवार रात को भव्य भजन संध्या और जागरण का आयोजन किया गया। इस विशाल भंडारे में लगभग 15 क्विंटल आटे की पूड़ियां और 8 बोरी शक्कर से बनी विशेष नुक्ती का प्रसाद तैयार किया गया था।
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श्रद्धालुओं ने पैदल चढ़कर दर्शन किए
सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए वाहनों को पहाड़ी के नीचे ही रोका गया, जिससे श्रद्धालुओं ने पैदल चढ़कर माता के दर्शन किए।
30 वर्षों की अटूट परंपरा
यह भंडारा क्षेत्र की पुरानी और अटूट परंपरा का प्रतीक बन चुका है। क्षेत्र के गांवों से स्वेच्छा से गेहूं और दान राशि एकत्र की जाती है। सुबह 9 बजे शुरू हुआ यह भंडारा अनवरत शाम तक चलता रहा, जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों के ट्रैक्टर-ट्रॉली, बैलगाड़ी और पैदल जत्थों में लोग पहुंचे।
जंगल के बीच स्थित इस मंदिर में श्रद्धालुओं ने पेड़ों की छांव में विश्राम किया और भक्तिमय माहौल का आनंद लिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि इसने क्षेत्र की एकता और सेवा भावना की एक अनुपम मिसाल भी पेश की।
