खातेगांव-कन्नौद क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने वाले 20 ठेकेदारों का 2 करोड़ का भुगतान अटका, 5 महीने से लगा रहे एटलसग्रीन कंपनी के चक्कर, भुगतान न होने पर धरने की चेतावनी
By Ashish Meena
नवम्बर 5, 2026
मालवा जंक्शन, खातेगांव।
मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी मां रेवा सिंचाई परियोजना के तहत खातेगांव और कन्नौद क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदार इन दिनों भारी आर्थिक संकट और प्रशासनिक उदासीनता से जूझ रहे हैं। पाइप लाइन बिछाने का कार्य करने वाले लगभग 20 ठेकेदारों का करीब पाँच महीने से बकाया भुगतान अटका हुआ है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से आए इन ठेकेदारों का दावा है कि एटलसग्रीन कंपनी और वेंस (वेनसर) पर उनके लगभग ₹2 करोड़ रुपए बकाया हैं। लगातार चक्कर काटने और सुनवाई न होने से क्षुब्ध ठेकेदारों ने अब प्रशासनिक अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। इस संबंध में एसडीएम, कन्नौद थाना प्रभारी और जल संसाधन विभाग को औपचारिक आवेदन देकर सख्त कार्रवाई और हस्तक्षेप की माँग की गई है।
30 से 45 दिन में भुगतान का दिया गया था भरोसा
पीड़ित ठेकेदारों ने बताया कि उन्होंने माँ रेवा सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम कुसमानिया सहित खातेगांव और कन्नौद क्षेत्र के अन्य ग्रामीण इलाकों में खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरी ईमानदारी से पूरा किया था। इस प्रोजेक्ट में एचडीपीई पाइप लाइन की भूमिगत खुदाई करने से लेकर भारी-भरकम एमएस पाइप लाइन डालने तक का कठिन कार्य शामिल था। इस दौरान मशीनरी, मजदूरों का वेतन, डीजल, ट्रैक्टर और अन्य जरूरी संसाधनों का पूरा खर्च ठेकेदारों ने अपनी जेब से उठाया था। कार्य पूर्ण होने के समय कंपनी के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि काम पूरा होने के मात्र 30 से 45 दिनों के भीतर उनका पूरा भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन पाँच महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी उन्हें एक धेला नसीब नहीं हुआ है।
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टालमटोल और तारीखों का खेल, अब फोन उठाने बंद
ठेकेदारों का गंभीर आरोप है कि वे अपने ही पैसों के भुगतान के लिए कंपनी के सीजीएम साइराम, एजीएम मनोहर शर्मा और पीएम विपिन यादव से लगातार संपर्क साध रहे हैं। कंपनी प्रबंधन द्वारा 16 जून से लेकर 29 अक्टूबर तक भुगतान के लिए कई बार अलग-अलग तारीखें दी गईं, लेकिन हर बार सिर्फ झूठे आश्वासन ही हाथ लगे। स्थिति यह है कि अब कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी उनके फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं। यहाँ तक कि उन्हें कंपनी कार्यालय के अंदर प्रवेश करने से भी रोक दिया जा रहा है, जिससे उनकी चिंताएँ और अधिक बढ़ गई हैं।
कंपनी बदलने का बहाना और धमकी भरा रवैया
ठेकेदारों की परेशानी तब और अधिक बढ़ गई जब हाल ही में कंपनी के कुछ नुमाइंदों ने कार्यालय के गेट पर आकर यह नया पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि एटलस कंपनी अब बंद हो चुकी है और वर्तमान में वहाँ वेंस कंपनी काम कर रही है। ठेकेदारों का आरोप है कि जब उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों पर बकाया राशि के लिए दबाव बनाया, तो उन्हें धमकी दी गई कि यदि मामले को मीडिया में उठाया गया या ज्यादा दबाव बनाया गया, तो उनके भुगतान की कोई जिम्मेदारी नहीं ली जाएगी।
दो दिन का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी
भुगतान के लाले पड़ने और दो करोड़ रुपये फँस जाने के कारण ठेकेदारों और उनके आश्रित मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर न्याय की आस लगाए बैठे ठेकेदारों ने एसडीएम और कन्नौद थाने में आवेदन देकर दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों के भीतर उनका बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने सैकड़ों मजदूरों के साथ ग्राम कुसमानिया स्थित कंपनी कार्यालय और स्टोर के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे।
