सीहोर जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध, धारा 163 का आदेश लागू, उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

By Ashish Meena
नवम्बर 3, 2026

मालवा जंक्शन, सीहोर।
सीहोर जिले में फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी बालागुरु के. ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश 2 नवंबर से लागू हो गया है और आगामी एक महीने तक प्रभावशील रहेगा।

धान, सोयाबीन और मक्का की नरवाई जलाने पर रोक

आदेश के अनुसार, जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य फसलों की कटाई के बाद खेतों में खड़ी नरवाई जलाने पर प्रतिबंध रहेगा।

प्रशासन के मुताबिक, नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं। इससे जमीन की उर्वरता प्रभावित होती है। साथ ही पर्यावरण, प्राकृतिक वनस्पति और जनसंपत्ति को नुकसान पहुंचता है।

खेतों में आग लगाने से आसपास के खेतों, संपत्तियों और बिजली की लाइनों को नुकसान पहुंचने के साथ आग फैलने का खतरा भी रहता है। किसानों के लिए फसल अवशेष हटाने के वैकल्पिक साधन उपलब्ध हैं। इसलिए नरवाई नहीं जलाने के निर्देश दिए गए हैं।

नरवाई जलाने पर रकबे के हिसाब से मुआवजा

आदेश में नरवाई जलाने पर भूमि के रकबे के आधार पर पर्यावरणीय मुआवजा तय किया गया है।
2 एकड़ से कम भूमि: 2,500 रुपए प्रति घटना
2 से 5 एकड़ से कम भूमि: 5,000 रुपए प्रति घटना
5 एकड़ से अधिक भूमि: 15,000 रुपए प्रति घटना

आदेश तोड़ने पर होगी कार्रवाई

प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 223 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश सीहोर जिले की पूरी राजस्व सीमा में लागू रहेगा।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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